खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के लिए तैयार छत्तीसगढ़, 30 राज्यों के 3800 खिलाड़ी दिखाएंगे दम

रायपुर। 25 मार्च से शुरू हो रहे पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी के लिए छत्तीसगढ़ पूरी तरह तैयार है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने इसे राज्य के खेल इतिहास का बड़ा और यादगार पड़ाव बताया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ के खेल पारिस्थितिकी तंत्र, प्रतिभाओं और बुनियादी ढांचे को नई मजबूती देगा।
अरुण साव ने कहा कि राज्य ने पहले सरगुजा ओलंपिक और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन छोटे स्तर पर सफलतापूर्वक किए हैं, लेकिन अब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के जरिए छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर के बड़े मंच पर अपनी क्षमता दिखाने जा रहा है। उनके मुताबिक यह आयोजन न सिर्फ राज्य की मेजबानी क्षमता की परीक्षा लेगा, बल्कि उसे नई ऊंचाई भी देगा।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को करीब से देखने और उनके साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के लिए बेहद प्रेरणादायक और समृद्ध अनुभव होगा। इससे राज्य के खिलाड़ियों को खेल के बड़े मंच के लिए तैयार होने का अवसर मिलेगा।
इस प्रतियोगिता में 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हिस्सा लेंगे। कुल 9 खेलों का आयोजन होगा, जिनमें तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती पदक स्पर्धाएं होंगी, जबकि मल्लखंब और कबड्डी प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल किए गए हैं। करीब 3800 प्रतिभागी इन खेलों में हिस्सा लेंगे और प्रतियोगिता 3 अप्रैल तक चलेगी।
खेलों का आयोजन रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा में किया जाएगा। कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर होंगे। इनमें एथलेटिक्स में सबसे ज्यादा 34 स्वर्ण, तैराकी में 24, कुश्ती में 18, वेटलिफ्टिंग में 16 और तीरंदाजी में 10 स्वर्ण पदक दिए जाएंगे। हॉकी और फुटबॉल के मुकाबले रायपुर में, एथलेटिक्स जगदलपुर में और कुश्ती सरगुजा में आयोजित होगी।
हॉकी ओलंपियन दिलीप तिर्की, सलीमा टेटे और धावक अनिमेष कुजूर ने इस आयोजन को आदिवासी खिलाड़ियों के लिए बड़ा मंच बताया। उनका कहना है कि यह प्रतियोगिता खेलों में करियर बनाने, प्रेरणा लेने और अपनी प्रतिभा देश के सामने रखने का शानदार अवसर है।
दिलीप तिर्की ने कहा कि देश में पहली बार इस तरह की चैंपियनशिप शुरू होना गर्व की बात है। उन्होंने इसे आदिवासी युवाओं के लिए अपनी पहचान बनाने और देश के लिए खेलने की दिशा में बड़ा अवसर बताया। वहीं अनिमेष कुजूर ने कहा कि देश के कई दूरदराज इलाकों में अब भी खेलों की पहुंच सीमित है, ऐसे में यह आयोजन आदिवासी युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने वाला अहम कदम है।
इस उद्घाटन संस्करण में शामिल खिलाड़ियों का चयन राष्ट्रीय खेल महासंघों द्वारा आयोजित ट्रायल्स के माध्यम से किया गया है। खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा नियुक्त कोच नजर रखेंगे। आयोजन में पुरुष और महिला खिलाड़ियों की भागीदारी लगभग बराबर रखी गई है, जो खेलों में लैंगिक समानता की दिशा में भी अहम संकेत माना जा रहा है।



