अस्पताल के स्ट्रेचर पर हुई अंतिम विदाई, घायल पति ने कांपते हाथों से भरी मांग

रायपुर। कहते हैं दुआएं मांगने के लिए लोग मंदिर जाते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के महासमुंद में खल्लारी माता के दर्शन कर लौट रहे एक परिवार के लिए ये सफर आखिरी साबित हुआ। महज चार महीने पहले आयुषी और ऋषभ ने साथ जीने-मरने की कसमें खाई थीं, लेकिन एक रोपवे हादसे ने सब कुछ तबाह कर दिया। आज फोर्थ आई न्यूज पर हम आपको एक ऐसी तस्वीर दिखाएंगे जिसे देखकर पत्थर दिल भी पिघल जाए। एक तरफ पत्नी की खामोश देह थी और दूसरी तरफ अस्पताल के बिस्तर पर बेबस घायल पति, जिसने अपनी पत्नी को आखिरी बार विदा तो किया, लेकिन उसकी बेबसी ऐसी थी कि वो उसे कंधा तक न दे सका।
चार महीने पहले… 23 नवंबर को जब ऋषभ और आयुषी सात फेरे ले रहे थे, तो चारों तरफ खुशियां थीं। रिश्तेदार गवाह थे एक नई शुरुआत के। किसे पता था कि मंदिर की जिस चौखट पर इस रिश्ते की दुआ मांगी गई थी, वहीं मौत अपना जाल बिछाए बैठी है।
सोमवार को रायपुर के अस्पताल का मंजर जिसने भी देखा, उसकी रूह कांप गई। ऋषभ खुद गंभीर रूप से घायल हैं, शरीर पर पट्टियां बंधी हैं, लेकिन दर्द शरीर का नहीं, उस जुदाई का था जो उन्हें उम्र भर का जख्म दे गई। अस्पताल के कमरे में जब पत्नी आयुषी का शव लाया गया, तो ऋषभ ने कांपते हाथों से आखिरी बार अपनी जीवनसंगिनी की मांग भरी। रीति-रिवाज के मुताबिक वो सिंदूर देना चाहते थे, पर चोटों ने उन्हें इतना लाचार कर दिया था कि हाथ आयुषी तक पहुंच ही नहीं पा रहे थे।
इस हादसे ने सिर्फ आयुषी की जान नहीं ली, बल्कि ऋषभ, उनके भाई शुभ और बहन शुभी को भी अस्पताल के बिस्तर पर पहुंचा दिया। जिस लाल जोड़े में आयुषी विदा होकर आई थी, उसी जोड़े में उसे अंतिम विदाई दी गई। पाटन के आत्मानंद स्कूल में पढ़ाने वाली आयुषी अब सिर्फ यादों में शेष है।
लेकिन इस दुख की घड़ी में सिस्टम का चेहरा और भी डरावना नजर आया। परिजनों का आरोप है कि इतना बड़ा हादसा हो गया, एक हंसता-खेलता परिवार खत्म हो गया, लेकिन न तो महासमुंद प्रशासन का कोई अधिकारी आया और न ही रोपवे कंपनी का कोई नुमाइंदा। अस्पताल के खर्च से लेकर एम्बुलेंस तक का इंतजाम खुद परिवार को करना पड़ रहा है।
सरकार ने जांच के आदेश तो दे दिए हैं, लेकिन सवाल वही है कि क्या ये जांच उन मासूमों को लौटा पाएगी? क्या रोपवे के मेंटेनेंस में हुई लापरवाही के दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी? या फिर एक और जांच फाइलों में दबकर रह जाएगी?



