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खल्लारी का अनसुलझा रहस्य: महाभारत काल से जुड़ी हैं मान्यताएं, क्या सच में नवविवाहितों के लिए वर्जित है ये पहाड़?

रायपुर। रहस्यमयी और गंभीर आवाज़ में] “खल्लारी पहाड़ी में छिपे महाभारत काल के रहस्यों और इस खौफनाक मान्यता का पूरा सच जानने से पहले… अगर आप भी छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों और आस्था से जुड़ी बेबाक खबरें देखना पसंद करते हैं, तो अभी ‘फोर्थ आई न्यूज़’ को सब्सक्राइब करें और इस वीडियो को लाइक करें।

महासमुंद ज़िले की शांत वादियों में 800 फीट की ऊंचाई पर स्थित खल्लारी माता का मंदिर सिर्फ एक देवी पीठ नहीं, बल्कि रहस्यों और मान्यताओं का एक पूरा संसार है। हाल ही में हुए रोपवे हादसे ने, जिसमें 4 महीने पहले ब्याही आयुषी साठकर की जान गई, एक पुरानी लोक-मान्यता को हवा दे दी है। इस इलाके के ग्रामीण और बुजुर्ग पीढ़ियों से ये मानते आए हैं कि शादी के 1 साल तक नए जोड़ों को एक साथ खल्लारी माता के दर्शन के लिए इस पहाड़ी पर कदम नहीं रखना चाहिए। स्थानीय मान्यताओं में इसे ‘अशुभ’ माना गया है। आयुषी के साथ हुए इस दर्दनाक इत्तेफाक ने लोगों के इस डर को एक खौफनाक सच में तब्दील कर दिया है।

लेकिन खल्लारी का रहस्य सिर्फ इस एक मान्यता तक सीमित नहीं है। इस पहाड़ी का इतिहास सीधे द्वापर युग, यानी महाभारत काल से जुड़ता है। किवदंतियों और लोककथाओं के मुताबिक, यही वो जगह है जहां कौरवों ने पांडवों को धोखे से ज़िंदा जलाने के लिए ‘लाक्षागृह’ का निर्माण करवाया था। कहा जाता है कि पांडवों ने इसी पहाड़ी के गुप्त रास्तों और सुरंगों से अपनी जान बचाई थी। आज भी इस पहाड़ की चट्टानों पर मौजूद भीम के विशालकाय पैरों के निशान, जिन्हें स्थानीय लोग ‘भीम खोज’ कहते हैं, इस पौराणिक कथा की गवाही देते हैं। कुछ लोककथाएं तो यह भी कहती हैं कि इसी इलाके में भीम का विवाह हिडिम्बा से हुआ था।

मान्यताओं के अनुसार, खल्लारी माता साक्षात नवदुर्गा का ही एक रूप हैं, जो इस पूरे इलाके की बुरी शक्तियों से रक्षा करती हैं। कहा जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से 800 से ज्यादा खड़ी सीढ़ियां चढ़कर माता के दरबार में मन्नत का धागा बांधता है, वो कभी खाली हाथ नहीं लौटता। निसंतान दंपत्तियों की गोद भरने से लेकर गंभीर बीमारियों को दूर करने तक, खल्लारी माता के चमत्कार पूरे मध्य भारत में मशहूर हैं। इसी दुर्गम चढ़ाई को आसान बनाने के लिए रोपवे शुरू किया गया था… लेकिन किसे पता था कि एक दिन सिस्टम की लापरवाही आस्था के इस सफर को मौत के सफर में बदल देगी।

सदियों से खल्लारी पहाड़ी ने कई चमत्कार देखे हैं और अपने सीने में कई रहस्य समेटे हैं। नवविवाहितों से जुड़ी मान्यता भी उसी लोक-आस्था का हिस्सा है, जिसे लोग आज भी मानते हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या इस पौराणिक मान्यता की आड़ में उस ‘सिस्टम’ और ठेकेदारों को माफ किया जा सकता है, जिनकी लापरवाही से रोपवे का केबल टूटा? इतिहास और लोककथाएं हमें आस्था और संयम सिखाती हैं, लेकिन किसी भी देवी के दरबार में ‘भ्रष्टाचार’ और चंद रुपयों के लिए लोगों की जान से खेलने वालों के लिए कोई माफी नहीं है। आस्था अपनी जगह है, और अपराध अपनी जगह!

क्या आप भी मानते हैं कि प्राचीन तीर्थ स्थलों पर इस तरह के कमर्शियल प्रोजेक्ट्स जैसे रोपवे के मेंटेनेंस में बड़ी लापरवाही बरती जाती है? खल्लारी माता से जुड़ी आपकी कौन सी आस्था या मान्यता है? कमेंट बॉक्स में अपने विचार ज़रूर साझा करें।

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