एक ‘गंगा इमली’ ने कैसे ली छत्तीसगढ़ के पहले सीएम की जान? अपने आप में पहला घटनाक्रम!
रायपुर। आज हम आपको एक ऐसा घटनाक्रम बताने जा रहे हैं जिसके चलते हमारे छत्तीसगढ़ प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री की हो असमय काल के गाल में समा गए…जी हाँ, हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी की, जिनका 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया । 1980 के दशक में आईएएस (IAS) की नौकरी छोड़कर राजनीति के अखाड़े में उतरने वाले जोगी का अंत एक ऐसी अप्रत्याशित दुर्घटना से हुआ, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी । एक ‘गंगा इमली’ के बीज ने कैसे उनकी जान ले ली? देखिए आगे इस रिपोर्ट में…
9 मई 2020, शनिवार का दिन। 74 वर्षीय अजीत जोगी रायपुर स्थित अपने निवास के बगीचे में अपनी दैनिक दिनचर्या के तहत व्हीलचेयर पर टहल रहे थे । इस दौरान वे ‘गंगा इमली’ यानी मीठी इमली खा रहे थे । तभी अचानक गंगा इमली का एक बीज सीधा उनकी श्वास नली यानी ट्रेकिया (Trachea) में जाकर फंस गया । सांस की नली ब्लॉक होते ही उन्हें गंभीर ‘रेस्पिरेटरी अरेस्ट’ हुआ और दोपहर करीब 12:30 बजे ऑक्सीजन की कमी के कारण उन्हें कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) पड़ा ।
गनीमत रही कि उनके घर पर ही एक वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद थे, जिन्होंने तुरंत सीपीआर (CPR) देना शुरू किया । इससे उनकी नाड़ी की गति वापस आ गई और उन्हें आनन-फानन में रायपुर के श्री नारायणा अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया । अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. सुनील खेमका और मुख्य इंटेंसिविस्ट डॉ. पंकज ओमर की टीम ने उनके गले से इमली का वह बीज बाहर निकाल लिया । लेकिन ऑक्सीजन न मिलने के कारण मस्तिष्क को भारी क्षति पहुंच चुकी थी। सीटी स्कैन में उनके मस्तिष्क में भारी सूजन (सेरेब्रल एडिमा) की पुष्टि हुई और उनकी न्यूरोलॉजिकल गतिविधियां लगभग शून्य हो गईं ।
कोमा में जा चुके मस्तिष्क को जगाने के लिए डॉक्टरों ने एक अनूठा और वैज्ञानिक रास्ता अपनाया— ‘ऑडियो थेरेपी’ । डॉक्टरों ने उन्हें इयरफ़ोन लगाए और उनके पसंदीदा छत्तीसगढ़ी गीत सुनाने शुरू किए। ‘अरपा पैरी के धार’, ‘पर्वतों से आज मैं टकरा गया’, ‘पाटा लेजा गाड़ी वाला’ और ‘मोर संग चलव रे’ जैसे गानों के जरिए उनकी पुरानी स्मृतियों को झंकृत करने की कोशिश की गई । इस थेरेपी का आंशिक असर भी दिखा। उनके ईईजी (EEG) टेस्ट में मस्तिष्क में हल्की हलचल दर्ज की गई और पुतलियों में मामूली संकुचन देखा गया, लेकिन वे कोमा से पूरी तरह बाहर नहीं आ सके ।
करीब 20 दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूलने के बाद, 27 मई की शाम से उनका रक्तचाप अस्थिर होने लगा । उसी रात लगभग 11 बजे उनके शरीर ने एक और झटका महसूस किया और उन्हें दूसरा बड़ा कार्डियक अरेस्ट आया । डॉक्टरों ने फिर से सीपीआर दिया, लेकिन उनका शरीर अब हार मानने लगा था। आखिरकार, 29 मई 2020, शुक्रवार की दोपहर अजीत जोगी ने अंतिम सांस ली । उनके बेटे अमित जोगी ने ट्वीट कर इस दुखद खबर की पुष्टि की और लिखा कि 20 वर्षीय युवा छत्तीसगढ़ के सिर से पिता का साया उठ गया है । ईसाई धर्म की मान्यताओं के अनुसार, गौरेला शहर के ज्योतिपुर इलाके के कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया ।
महज एक गंगा इमली के बीज ने राज्य की सियासत के उस कद्दावर नेता को हमेशा के लिए शांत कर दिया, जो मारवाही से मौजूदा विधायक थे और जिन्होंने कांग्रेस से अलग होकर ‘जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे)’ नाम की अपनी पार्टी बनाई थी । यह घटना हमें याद दिलाती है कि मानव शरीर कितना नाजुक है। देश और दुनिया की बाकी महत्वपूर्ण खबरों के लिए आप बने रहिए, फोर्थ आई न्यूज़ के साथ। नमस्कार।




