रागी की खेती से बदली किस्मत: धमतरी की महिला किसान बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

रायपुर। राज्य और केंद्र सरकार द्वारा लघु धान्य फसलों जैसे रागी, कोदो और कुटकी को बढ़ावा देने के प्रयास अब ज़मीनी स्तर पर असर दिखा रहे हैं। धमतरी विकासखंड के ग्राम उरपुटी की महिला किसान शकुन बाई कुजाम इसका बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरी हैं। उन्होंने रागी की खेती अपनाकर खुद को प्रगतिशील किसानों की श्रेणी में स्थापित किया है।
पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए शकुन बाई ने आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत और कृषि विभाग के मार्गदर्शन से उल्लेखनीय सफलता हासिल की। उनके पास 7 एकड़ सिंचित भूमि है और खेती के लिए ट्रैक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल, मल्टी क्रॉप थ्रेसर और रीपर जैसे आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं। परिवार के सदस्य भी खेती में सक्रिय सहयोग करते हैं।
रबी सीजन में उन्होंने 3 एकड़ में छत्तीसगढ़ रागी-2 किस्म की खेती की। बीजोपचार के लिए बीजामृत और खाद के रूप में वर्मी कम्पोस्ट, डीएपी, पीएसबी व केएसबी का उपयोग किया गया। वैज्ञानिक पद्धति से की गई खेती से उन्हें 28.50 क्विंटल उत्पादन मिला। बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत उन्हें 5200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से 1,48,200 रुपये की आय हुई, जबकि कुल लागत 27,000 रुपये रही। इस तरह उन्हें 1,21,200 रुपये का शुद्ध लाभ मिला।
कृषि विभाग के आत्मा कार्यक्रम से मिले तकनीकी सहयोग ने उन्हें फसल चक्र और लघु धान्य फसलों की खेती में आगे बढ़ने में मदद की। उनकी सफलता से प्रभावित होकर कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने उनके घर पहुंचकर उनकी सराहना की और इसे अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक बताया।
शकुन बाई की यह उपलब्धि दिखाती है कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। उनकी कहानी अब क्षेत्र के किसानों के लिए नई उम्मीद और प्रेरणा बन चुकी है।




