Whether it's due to the fear of an oil crisis or the government's compulsion, the RBI has taken a significant risk by freezing interest rates in India.

तेल संकट का डर या सरकार की मजबूरी भारत में ब्याज दरें रोककर RBI ने लिया बड़ा रिस्क

08 अप्रैल 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया जब वैश्विक स्तर पर मध्य पूर्व संकट के कारण आर्थिक अनिश्चितता बढ़ गई है। खासकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव ने तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर दबाव बढ़ा है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी लगभग 90 प्रतिशत तेल जरूरतें आयात करता है, ऐसे में तेल कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर पड़ता है। RBI ने इसी जोखिम को देखते हुए सतर्क रुख अपनाया और ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया।

RBI गवर्नर ने संकेत दिया कि अब “वेट एंड वॉच” की नीति अपनाई जाएगी क्योंकि वैश्विक स्थिति तेजी से बदल रही है। GDP ग्रोथ का अनुमान भी घटाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया गया है, जो पहले 7.6 प्रतिशत था। वहीं, महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।

विदेशी निवेश में भी गिरावट देखने को मिली है, जहां लगभग 19 अरब डॉलर की निकासी दर्ज की गई। इसके अलावा रुपये में भी कमजोरी आई है। इन सभी संकेतों को देखते हुए RBI ने फिलहाल जोखिम न लेने का फैसला किया।

यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अगर महंगाई 6 प्रतिशत से ऊपर जाती है तो भविष्य में दरें बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।

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