घने जंगलों में पहुंची हाईटेक सेहत सेवा: मालेवाही में डिजिटल एक्सरे से बदली ग्रामीणों की तस्वीर

रायपुर। बस्तर के सुदूर वनांचल अब स्वास्थ्य सेवाओं से अछूते नहीं रह गए हैं। लोहंडीगुड़ा ब्लॉक के आखिरी छोर पर बसे ग्राम मालेवाही में आयोजित विशेष स्वास्थ्य शिविर ने विकास की नई मिसाल पेश की है। दुर्गम रास्तों को पार कर पहुँची मेडिकल टीम ने न केवल ग्रामीणों का इलाज किया, बल्कि भरोसे की एक मजबूत नींव भी रखी।
प्रशासनिक मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग की टीम आधुनिक डिजिटल तकनीकों के साथ गाँव पहुँची, जहाँ पहली बार ग्रामीणों को उच्च स्तरीय जांच सुविधाएं मिलीं। खास बात रही पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे मशीन, जिसने जंगल के बीच ही मिनी डायग्नोस्टिक सेंटर जैसा माहौल तैयार कर दिया।
पहले जहां एक एक्स-रे के लिए ग्रामीणों को घंटों सफर करना पड़ता था, अब वहीं मौके पर ही फेफड़ों के संक्रमण और अन्य बीमारियों की सटीक जांच संभव हो सकी। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत इस तकनीक ने संदिग्ध मरीजों की तुरंत पहचान कर इलाज की प्रक्रिया को तेज कर दिया है।
शिविर में इलाज के साथ-साथ जागरूकता पर भी जोर दिया गया। स्थानीय भाषा में स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी गई। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और गंभीर रोगों के मरीजों की विशेष जांच की गई, वहीं मौसमी बीमारियों की दवाइयां निःशुल्क वितरित की गईं।
गांव में ही डॉक्टर और आधुनिक मशीनों को देखकर ग्रामीणों में उत्साह साफ नजर आया। लोगों का कहना है कि इससे उन्हें समय, पैसे और मेहनत—तीनों की बचत हुई है। यह पहल दर्शाती है कि जब तकनीक और संवेदनशील प्रशासन साथ आते हैं, तो विकास की रोशनी सच में अंतिम छोर तक पहुंचती है।




