छत्तीसगढ़ की कोसा साड़ी को मिलेगा नया ग्लोबल लुक! डिज़ाइन और तकनीक में बदलाव से बढ़ेगी मांग

रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने लोकभवन में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कोसा साड़ी, शॉल और गमछा का अवलोकन किया और इन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाथकरघा उत्पादों को आधुनिक बनाने के लिए नवाचार, डिजाइन विकास और वैल्यू एडिशन बेहद जरूरी है।
राज्यपाल ने सुझाव दिया कि कोसा साड़ी और शॉल में डॉबी व जैकार्ड तकनीक का इस्तेमाल कर नए और आधुनिक डिज़ाइन तैयार किए जाएं। साथ ही अलग-अलग आयु वर्ग की पसंद को ध्यान में रखते हुए उत्पादों को आकर्षक और किफायती बनाया जाए, ताकि बाजार में इनकी मांग बढ़ सके।
उन्होंने असम के सुवालकुची, विजयनगर और डेमाजी जैसे प्रसिद्ध रेशम केंद्रों के सफल मॉडल का अध्ययन कर वहां के लोकप्रिय डिजाइनों को छत्तीसगढ़ के कोसा वस्त्रों में शामिल करने की बात कही। उनका मानना है कि इससे बुनकरों को नई पहचान मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
इसके अलावा कोसा साड़ी को सस्ता और ज्यादा उपयोगी बनाने के लिए साड़ी की बॉडी और बॉर्डर को अलग-अलग तैयार करने का सुझाव दिया गया। राज्यपाल ने एक्रेलिक, स्पन और टू-प्लाई यार्न जैसे विशेष धागों के उपयोग से आकर्षक मोटिफ और डिज़ाइन विकसित करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने एक महीने के भीतर इस दिशा में हुई प्रगति की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। साथ ही ग्रामोद्योग विभाग को किसी एक बुनकर सहकारी समिति को गोद लेकर उसके समग्र विकास के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने को कहा।
बैठक में ग्रामोद्योग विभाग के सचिव श्याम धावड़े, राज्य हाथकरघा संघ के सचिव एम.एम. जोशी, बुनकर सेवा केंद्र रायगढ़ के उपनिदेशक विजय सावनेरकर सहित कई तकनीकी विशेषज्ञ और डिजाइनर मौजूद रहे।



