रुपया धड़ाम! डॉलर के सामने ऐतिहासिक गिरावट ने बढ़ाई आर्थिक चिंता

20 मई 2026 को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.53 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। लगातार छठे कारोबारी सत्र में गिरावट के पीछे ऊंची कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की सतर्कता को प्रमुख कारण बताया गया। विश्लेषकों के अनुसार भारत का आयात बिल बढ़ने और चालू खाते पर दबाव बढ़ने की आशंका ने बाजार की चिंता को गहरा किया है।
रुपये की कमजोरी का असर शेयर बाजार की धारणा पर भी दिखा। आयात आधारित क्षेत्रों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है, जबकि महंगाई को लेकर आशंकाएं तेज हुई हैं। हालांकि आईटी जैसे निर्यात आधारित क्षेत्रों को कमजोर रुपये से कुछ लाभ मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुद्रा की स्थिरता के लिए तेल कीमतों में राहत और विदेशी निवेश प्रवाह की वापसी अहम होगी। यह गिरावट आम लोगों के लिए विदेश यात्रा, आयातित सामान और ईंधन लागत पर अप्रत्यक्ष असर डाल सकती है।



