बागी हुए नेतन्याहू, अमेरिका-ईरान शांति समझौते को इजराइल ने लात मारकर नकारा, वाशिंगटन से आर-पार की जंग!

तेल अवीव (22 जून 2026): इजराइल और अमेरिका के बीच दशकों पुराने तथाकथित ‘जिगरी याराने’ के ताबूत में आखिरी कील ठुक चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ गुपचुप तरीके से किए गए प्रारंभिक शांति समझौते (Framework Agreement) को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी कैबिनेट ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।
इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने 15 जून 2026 को कैमरे के सामने दहाड़ते हुए साफ कहा कि, “ट्रंप का समझौता हमारे ऊपर बाध्यकारी नहीं है। इजराइल अमेरिका का पिट्ठू नहीं है, हम एक संप्रभु राष्ट्र हैं और स्टेट ऑफ इजराइल कोई बनाना रिपब्लिक नहीं है।”
इससे भी बड़ा धमाका पेंटागन की उस खुफिया रिपोर्ट से हुआ है, जो 6-7 जून 2026 को लीक हुई। अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) ने इजराइल के जासूसी खतरे को ‘हाई’ से बढ़ाकर ‘क्रिटिकल’ (अत्यंत खतरनाक) श्रेणी में डाल दिया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने खुलासा किया है कि इजराइल खुद को अमेरिकी नियंत्रण से बचाने और वाशिंगटन की आंतरिक बैठकों की भनक पाने के लिए अमेरिकी मुख्य वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और पेंटागन पॉलिसी चीफ एलब्रिज कोल्बी के फोन और उपकरणों की जासूसी करवा रहा था।
अमेरिका चाहता है कि इजराइल लेबनान में बमबारी तुरंत रोके, लेकिन इजराइली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज़ ने अमेरिकी हुक्म को ठेंगा दिखाते हुए साफ कर दिया है कि उनकी सेना लेबनान और गाजा के बफर जोन में अनिश्चितकाल तक बनी रहेगी। नेतन्याहू के इस बागी तेवर ने साबित कर दिया है कि इजराइल अब अमेरिका का रिमोट कंट्रोल बनने को तैयार नहीं है।


