‘शर्मनाक ढांचा और दिशाहीन कप्तानी!’ श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज़ से पहले फिर खुली भारतीय टीम की पोल, क्या ऐसे बनेगा WTC चैंपियन?

भारतीय क्रिकेट टीम के फैंस जिस खौफ से डर रहे थे, वही मंज़र एक बार फिर मैदान पर उतर आया है। श्रीलंका दौरे पर टेस्ट सीरीज़ से ठीक पहले वार्म-अप मैच में श्रीलंका क्रिकेट XI के बल्लेबाज़ों ने भारतीय पेस अटैक की ऐसी धज्जियां उड़ाईं कि 363 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव और मानव सुथार जैसे स्पिनरों के भरोसे किसी तरह लाज बचाने की कोशिश ज़रूर हुई, लेकिन मुख्य गेंदबाज़ी आक्रमण की यह लाचारी साफ़ बता रही है कि टीम मैनेजमेंट किस कदर दिशाहीन है। कप्तान शुभमन गिल और हेड कोच गौतम गंभीर की जोड़ी के तहत भारतीय टेस्ट क्रिकेट में जो ‘गंभीर’ संकट छाया है, वह अब छिपने का नाम नहीं ले रहा।
ऑस्ट्रेलिया के कड़वे अनुभवों के बाद जब उम्मीद थी कि टीम इंडिया में अनुशासन और रणनीति का नया दौर आएगा, तब मैदान पर सिर्फ भ्रम और कमज़ोर फैसले देखने को मिल रहे हैं। शुभमन गिल को कप्तानी का ताज तो पहना दिया गया, लेकिन मैदान पर उनकी निर्णय क्षमता में न तो वह धार दिखती है और न ही आत्मविश्वास। शार्दुल ठाकुर और नितीश कुमार रेड्डी को टीम में रखकर गेंद न थमाना, या वाशिंगटन सुंदर को सही समय पर इस्तेमाल न करना—ये ऐसी गलतियां हैं जो किसी स्कूली स्तर के कप्तान से भी अपेक्षित नहीं होतीं। ड्रेसिंग रूम में गौतम गंभीर का दबाव इतना हावी दिखता है कि कप्तान खुद मैदान पर 10 खिलाड़ियों के साथ उतरता महसूस होता है।
वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) का फाइनल दांव पर लगा है और भारतीय टीम का टॉप-ऑर्डर रेत के महल की तरह ढहने को तैयार बैठा है। अगर गॉल टेस्ट से पहले चयन समिति और टीम प्रबंधन ने अपनी यह जिद और प्रयोगधर्मिता नहीं छोड़ी, तो श्रीलंका की धरती पर भारतीय क्रिकेट को वह ऐतिहासिक हार झेलनी पड़ेगी जिसकी भरपाई सालों तक नहीं हो पाएगी। सवाल सीधा है: क्या बीसीसीआई केवल प्रयोगों का अड्डा बनकर रह जाएगा या मैदान पर आक्रामक जीत दर्ज करने का दम दिखाएगा?




