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किरण देव ने केंद्र से मांगा विशेष राहत पैकेज, जोरा नाला की नई DPR और 24-48 घंटे पहले अलर्ट सिस्टम की मांग

छत्तीसगढ़ के बस्तर में हालिया बाढ़ के बाद अब राहत के साथ-साथ भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए स्थायी व्यवस्था की मांग तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं जगदलपुर विधायक किरण देव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री एवं एनडीएमए अध्यक्ष सी.आर. पाटिल, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा को पत्र लिखकर बस्तर के बाढ़ प्रभावितों के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की है। पत्र में जोरा नाला की नई डीपीआर, आधुनिक गेटेड रेगुलेटर, रियल-टाइम टेलीमेट्री और सेंसर आधारित बाढ़ चेतावनी प्रणाली सहित कई दीर्घकालिक उपाय सुझाए गए हैं।

खातीगुड़ा बांध से पानी छोड़ने के बाद बस्तर में बढ़ा संकट

28 सितंबर 2026 को लिखे पत्र में किरण देव ने कहा है कि ओडिशा स्थित इंद्रावती जलाशय यानी खातीगुड़ा बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने और क्षेत्र में बारिश के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया। पत्र के अनुसार, जगदलपुर शहर के कई वार्डों के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्र भी बाढ़ की चपेट में आए। फसलों, मकानों, पशुधन और जनजीवन को नुकसान पहुंचने का उल्लेख पत्र में किया गया है।

हालिया बाढ़ के दौरान छत्तीसगढ़ के कई जिलों में बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया गया था। 28 सितंबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में 571 गांवों के 22,377 लोग प्रभावित हुए थे और 16,074 लोगों को रेस्क्यू किया गया था।

किसानों से लेकर मकान और दुकानदारों तक राहत की मांग

किरण देव ने केंद्र सरकार से बस्तर के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए विशेष राहत एवं मुआवजा पैकेज स्वीकृत करने का आग्रह किया है।

पत्र में प्रमुख रूप से कहा गया है कि—

  • बाढ़ से बर्बाद खरीफ फसलों के लिए किसानों को प्रति एकड़ विशेष राहत राशि NDRF मद से स्वीकृत की जाए।
  • क्षतिग्रस्त कच्चे और पक्के मकानों वाले परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राथमिकता दी जाए।
  • प्रभावित परिवारों को तत्काल जीवन-यापन के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
  • बाढ़ में बह गए पशुधन का सर्वे कराकर मुआवजा दिया जाए।
  • छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के नुकसान का आकलन कर DBT के माध्यम से सहायता पहुंचाई जाए।

इससे साफ है कि मांग केवल तत्काल राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और आर्थिक नुकसान की भरपाई पर भी जोर दिया गया है।

जोरा नाला की नई DPR क्यों अहम?

पत्र में जोरा नाला की नए सिरे से DPR यानी Detailed Project Report तैयार करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है।

किरण देव ने जोरा नाला और इंद्रावती नदी के जलप्रवाह से जुड़ी समस्या के लिए आधुनिक हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन कराने का सुझाव दिया है। इसके आधार पर संशोधित DPR तैयार करने की मांग की गई है।

इसके अलावा जोरा नाला पर आधुनिक Gated Regulator Structure बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। पत्र के मुताबिक, इसका उद्देश्य मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी के प्रवाह को वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रित करना और इंद्रावती तथा जोरा नाला के बीच जलप्रवाह को व्यवस्थित करना है।

बाढ़ प्रबंधन के लिए कई स्थायी उपायों का प्रस्ताव

पत्र में केवल बांध और नाले तक समस्या को सीमित नहीं रखा गया है। इसमें पूरे कैचमेंट एरिया के स्तर पर काम करने का सुझाव दिया गया है।

इसके तहत इंद्रावती नदी और उसकी सहायक नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में बड़े स्तर पर पौधरोपण, मृदा संरक्षण और कंटूर ट्रेंचिंग की मांग की गई है, ताकि बारिश के पानी के तेज बहाव और गाद के प्रवाह को नियंत्रित किया जा सके।

साथ ही केंद्रीय जल आयोग के तकनीकी मार्गदर्शन में इंद्रावती नदी के तल में लंबे समय से जमा गाद को हटाने के लिए Dredging और Desilting Project स्वीकृत करने की मांग भी पत्र में है।

जगदलपुर में Integrated Storm Water Drainage System की मांग

शहर में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए पत्र में AMRUT योजना के तहत Integrated Storm Water Drainage System विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है।

इसके साथ ही नदी के संवेदनशील तटीय क्षेत्रों में पक्के Guide Bunds और Embankments बनाने की मांग की गई है।

यानी प्रस्तावित योजना में गांवों के कैचमेंट क्षेत्र से लेकर नदी, नाला और शहर के ड्रेनेज सिस्टम तक को एक साथ जोड़कर बाढ़ प्रबंधन का ढांचा तैयार करने की बात कही गई है।

पानी छोड़ने से पहले 24 से 48 घंटे का अलर्ट

पत्र की सबसे महत्वपूर्ण मांगों में से एक Real-Time Flood Warning System है।

किरण देव ने सुझाव दिया है कि खातीगुड़ा बांध से पानी छोड़ने के समय और मात्रा का रियल-टाइम टेलीमेट्री डेटा छत्तीसगढ़ प्रशासन के साथ साझा किया जाए। इसके लिए केंद्रीय जल आयोग को नोडल एजेंसी बनाने की मांग की गई है।

इसके अलावा इंद्रावती बेसिन में सेंसर आधारित ऑटोमेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने का सुझाव दिया गया है। पत्र में कहा गया है कि ऐसी व्यवस्था से निचले इलाकों को पानी छोड़े जाने से कम से कम 24 से 48 घंटे पहले खाली कराने की तैयारी की जा सकती है।

केंद्र की अंतर-मंत्रालयीन टीम भेजने की मांग

किरण देव ने बाढ़ से हुए नुकसान के भौतिक सत्यापन के लिए केंद्र सरकार की Inter-Ministerial Central Team बस्तर भेजने का भी आग्रह किया है।

पत्र में विशेष रूप से “विशेष बस्तर बाढ़ राहत, जोरा नाला DPR एवं पुनरुद्धार पैकेज” को जल्द मंजूरी देने की मांग रखी गई है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये फिलहाल पत्र के माध्यम से की गई मांगें और प्रस्ताव हैं। इनके स्वीकृत होने की पुष्टि अलग सरकारी आदेश से होगी। 2 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों में भी इन्हीं मांगों का उल्लेख किया गया है।

बस्तर की हालिया बाढ़ ने राहत और बचाव के साथ-साथ लंबे समय के लिए जल प्रबंधन की जरूरत को भी सामने ला दिया है। किरण देव के पत्र में तत्काल मुआवजे से लेकर जोरा नाला की नई DPR, गेटेड रेगुलेटर, नदी की ड्रेजिंग, शहर के स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज और 24-48 घंटे पहले चेतावनी देने वाली प्रणाली तक कई प्रस्ताव रखे गए हैं।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र और राज्य सरकार इन मांगों पर क्या निर्णय लेती हैं और बस्तर के लिए प्रस्तावित राहत एवं दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन योजनाओं को किस स्तर पर मंजूरी मिलती है।

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