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मजदूरी से डिजिटल उद्यमी बनी सुशीला, स्व-सहायता समूह ने बदली जिंदगी की तस्वीर

छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की योजनाएं ग्रामीण महिलाओं के सपनों को नई उड़ान दे रही हैं। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं और आधुनिक तकनीक के जरिए अपने गांव में ही रोजगार के नए अवसर तैयार कर रही हैं। सूरजपुर जिले के छतरंग गांव की सुशीला सिंह इसकी प्रेरणादायक कहानी हैं, जिन्होंने मेहनत और सरकारी योजनाओं के सहयोग से संघर्ष से सफलता तक का सफर तय किया है।

एक समय ऐसा था जब सुशीला सिंह परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए कृषि मजदूरी करती थीं। सीमित आय और जिम्मेदारियों के बोझ के बीच उनका जीवन कठिनाइयों से भरा था। इसी दौरान उन्होंने शिवा स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी जिंदगी को नई दिशा देने का निर्णय लिया।

समूह से जुड़ने के कुछ महीनों बाद उन्हें सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) के तहत ऋण मिला। इस सहायता से उन्होंने बीसी सखी के रूप में काम शुरू किया और गांव के लोगों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने लगीं। इससे उनकी आमदनी बढ़ी और आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ।

बढ़ती आय के साथ उन्होंने लैपटॉप खरीदकर डिजिटल सेवा एवं फोटोकॉपी सेंटर की शुरुआत की। बाद में कंप्यूटर, पासबुक प्रिंटर और अन्य संसाधनों की मदद से ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार किया। कारोबार को और आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने 50 हजार रुपये का अतिरिक्त ऋण लिया।

आज उनके डिजिटल उद्यम में करीब 1.50 लाख रुपये का निवेश है और अब तक उन्हें लगभग 2.70 लाख रुपये का लाभ मिल चुका है। उनकी मासिक आय 15 से 18 हजार रुपये तक पहुंच गई है। आर्थिक मजबूती के साथ अब वे अपनी बेटी को बेहतर शिक्षा दे रही हैं और परिवार की जरूरतों को सम्मान के साथ पूरा कर रही हैं।

सुशीला सिंह का मानना है कि आजीविका और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं ने उन्हें गरीबी से बाहर निकलकर आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर दिया है।

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