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समग्र डेयरी विकास योजना से गांवों में समृद्धि की दस्तक, 13 पशुपालकों को मिली दुधारू गाय

रायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए संचालित समग्र डेयरी विकास योजना सकारात्मक परिणाम दे रही है। विकासखंड रामचंद्रपुर के ग्राम पचावल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कृषि विकास एवं किसान कल्याण, जैव प्रौद्योगिकी, पशुपालन तथा मछली पालन मंत्री रामविचार नेताम ने 13 चयनित पशुपालकों को दुधारू गाय, साइलेज पशुआहार और खनिज मिश्रण प्रदान किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल पशु वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि पशुपालन आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन चुका है और यह किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम साबित हो रहा है।

मंत्री ने जानकारी दी कि पहले यह योजना केवल आदिवासी समुदाय के लिए उपलब्ध थी, लेकिन अब सरकार ने इसे सभी वर्गों के लिए लागू कर दिया है। इससे अधिक ग्रामीण परिवार डेयरी व्यवसाय से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि योजना के तहत लाभार्थियों को सिर्फ दुधारू गाय ही नहीं, बल्कि साइलेज, संतुलित पशु आहार, खनिज मिश्रण, एक वर्ष का पशु बीमा, पशु निगरानी उपकरण और वैज्ञानिक पशुपालन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे पशुपालक आधुनिक तकनीकों के जरिए उत्पादन बढ़ाकर बेहतर आय अर्जित कर सकेंगे।

कार्यक्रम में पशु चिकित्सा विभाग द्वारा संचालित टीकाकरण, उपचार और रोग नियंत्रण कार्यक्रमों की भी सराहना की गई। पशुपालकों को समय पर टीकाकरण कराने और वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन अपनाने की सलाह दी गई।

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) डेयरी सर्विसेज के सहयोग से संचालित इस योजना के माध्यम से लाभार्थियों को अनुदान और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही दूध संग्रहण और विपणन की बेहतर व्यवस्था विकसित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्राम पचावल में दुधारू गाय प्राप्त करने वाले हितग्राहियों की खुशी इस बात का संकेत है कि योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचने पर वे पूरे परिवार के जीवन में बदलाव ला सकती हैं। यह योजना ग्रामीण परिवारों के लिए नियमित आय, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, बच्चों की शिक्षा और आत्मसम्मान को मजबूत करने का माध्यम बन रही है।

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