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संत कबीर महोत्सव में गूंजा समरसता का संदेश, सोनपैरी आश्रम से सेवा, विकास और पर्यावरण संरक्षण का आह्वान

रायपुर के सोनपैरी स्थित सद्गुरु कबीर आश्रम में कबीर जयंती के अवसर पर आयोजित संत कबीर महोत्सव में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत शामिल हुए। दोनों ने गुरु असंग देव से आशीर्वाद लेकर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने आश्रम परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

गुरु असंग देव ने संत कबीर के जीवन और विचारों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने समाज से पाखंड, कुरीतियों और आडंबर को समाप्त करने का संदेश दिया। उन्होंने आपसी प्रेम, संवाद, सेवा, गौसेवा, वृक्षारोपण और ग्राम विकास को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि सेवा ही सच्चे सुख और आत्मिक संतोष का मार्ग है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी नक्सलवाद का प्रभाव था, वहां अब शांति और विकास का वातावरण बन रहा है तथा गरीबों के लिए बड़ी संख्या में आवास तैयार किए जा रहे हैं।

राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कहा कि संत कबीर का सत्य, समरसता, मानव सेवा और सद्भाव का संदेश आज भी समाज के लिए उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने सोनपैरी कबीर आश्रम द्वारा शिक्षा, गौसेवा, जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए इसे राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ संत कबीर की तपोभूमि है और उनकी शिक्षाओं का समाज पर गहरा प्रभाव है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को तेजी से लागू कर रही है। प्रदेश में 18 लाख आवास स्वीकृत हुए हैं, जिनमें 10 लाख से अधिक पूरे हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के प्रभावी उपयोग की अपील करते हुए बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि तीन माह बढ़ाने की घोषणा भी की, जिससे उपभोक्ताओं को सरचार्ज माफी सहित अन्य लाभ मिल सकेंगे।

कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने वृक्षारोपण को भविष्य की पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी बताया, जबकि केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने संत कबीर के सत्य, सेवा और सदाचार के संदेश को अपनाने का आह्वान किया। महोत्सव में संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में कबीरपंथी अनुयायियों की उपस्थिति रही।

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