मजदूरी से डिजिटल उद्यमी बनीं सुशीला, स्व-सहायता समूह ने बदली जिंदगी

राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण और आजीविका योजनाएं ग्रामीण महिलाओं के लिए बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। सूरजपुर जिले के ग्राम छतरंग की सुशीला सिंह इसकी प्रेरक मिसाल हैं। कभी खेतों में मजदूरी कर परिवार चलाने वाली सुशीला आज बीसी सखी के रूप में डिजिटल सेवा केंद्र संचालित कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
आर्थिक तंगी से जूझ रही सुशीला ने शिवा स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन की नई शुरुआत की। समूह से कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (सीआईएफ) के तहत मिले ऋण से उन्होंने बीसी सखी का काम शुरू किया। बढ़ती आय के साथ उन्होंने लैपटॉप खरीदा और फोटोकॉपी व ऑनलाइन सेवा केंद्र की शुरुआत की। बाद में कंप्यूटर, पासबुक प्रिंटर सहित अन्य उपकरण जोड़कर ग्रामीणों को विभिन्न डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने लगीं।
व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने स्व-सहायता समूह से 50 हजार रुपये का अतिरिक्त ऋण लिया। आज उनके कारोबार में लगभग 1.50 लाख रुपये का निवेश है और अब तक करीब 2.70 लाख रुपये का लाभ मिल चुका है। उनकी मासिक आय 15 से 18 हजार रुपये और वार्षिक आय लगभग 1.40 लाख रुपये हो गई है। अब वे अपनी बेटी की बेहतर शिक्षा के साथ परिवार की जरूरतें सम्मानपूर्वक पूरी कर रही हैं।
सुशीला का कहना है कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बड़ा बदलाव आया है। वे नियमित रूप से ऋण चुका रही हैं और आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, संस्थागत सहयोग और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं न केवल अपनी तकदीर बदल सकती हैं, बल्कि समाज के विकास में भी अहम भूमिका निभा सकती हैं।




