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अमेरिका के आगे झुका नहीं भारत: भारी दबाव के बावजूद मोदी सरकार ने सुरक्षित रखी देश की एनर्जी सिक्योरिटी, यूएस से बढ़ाएगा तेल आयात!

भारत-अमेरिका संबंध (ऊर्जा और व्यापार मोर्चे पर भारत की जीत)

मध्य पूर्व में जारी भयंकर युद्ध के बीच भारत ने एक बार फिर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और कूटनीतिक ताकत का लोहा मनवाया है। पिछले 24 घंटों में वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद यह साफ हो गया है कि भारत किसी भी महाशक्ति के दबाव में आकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों और रूस-यूक्रेन के बीच जारी तनाव के माहौल में अमेरिका चाहता था कि भारत अपनी तेल आयात नीतियों को पूरी तरह अमेरिकी शर्तों के अधीन करे। लेकिन भारत की आक्रामक और दृढ़ कूटनीति के सामने अमेरिका को झुकना पड़ा है और दोनों देशों ने एक संतुलित व्यापारिक रूपरेखा पर सहमति जताई है।

भारत ने साफ कर दिया है कि देश के 140 करोड़ नागरिकों के हितों के लिए जहां से भी सस्ता और सुरक्षित तेल मिलेगा, भारत वहां से आयात करेगा। हालांकि, भारत-अमेरिका के बीच हुए हालिया ऐतिहासिक व्यापार समझौते के तहत भारत ने अमेरिका से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने पर सहमति दी है, जिससे भारत की खाड़ी देशों पर निर्भरता कम होगी और देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहेंगी। इस समझौते के बदले में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले भारी टैरिफ को 50% से घटाकर मात्र 18% कर दिया है, जो भारतीय निर्यातकों के लिए लॉटरी लगने जैसा है। यह भारत की बहुत बड़ी कूटनीतिक विजय है, जहां भारत ने अमेरिका को करोड़ों डॉलर का खरीदार बनाकर अपने व्यापारिक हितों को भी पूरी तरह सुरक्षित कर लिया है।

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