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खाड़ी में अमेरिका के आगे झुका ईरान! भारत ने साफ शब्दों में चेताया- हमारे कच्चे तेल की सप्लाई रुकी तो अंजाम भुगतने को तैयार रहे तेहरान!

ईरान पर अमेरिकी शिकंजा और भारत का दांव

ईरान और अमेरिका के बीच छिड़े इस भीषण युद्ध के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक और आर्थिक संप्रभुता का लोहा मनवा दिया है। पिछले 24 घंटों में वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच हुई उच्च स्तरीय रणनीतिक समीक्षा में भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि खाड़ी देशों में चल रही इस लड़ाई का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर नहीं पड़ना चाहिए। ईरान द्वारा हरमुज जलडमरूमध्य को बाधित करने की हरकतों पर भारत ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। भारत ने ईरान को कड़े लहजे में समझा दिया है कि भारत के एलपीजी (LPG) और कच्चे तेल के जहाजों को रोकना तेहरान को भारी पड़ेगा। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी भी देश की दादागीरी बर्दाश्त नहीं करेगा।

इधर, अमेरिका ने भी भारत की रणनीतिक अहमियत को समझते हुए जुलाई 2026 में ईरानी कच्चे तेल की खरीद के लिए भारत को एक विशेष 60 दिनों की ढील (Waiver) दी है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस बार अमेरिका ने भारत को सीधे डॉलर में भुगतान करने की मंजूरी दी है। यह भारत की बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत है। भारत ने अमेरिका को साफ कह दिया है कि वह अपनी शर्तों पर और भारी डिस्काउंट मिलने पर ही ईरान से तेल की बात करेगा, अन्यथा भारत के पास रूस जैसे भरोसेमंद विकल्प मौजूद हैं जो भारत को रिकॉर्ड 2.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल दे रहे हैं। भारत ने ईरान की दुखती रग पर हाथ रख दिया है—अगर ईरान को भारत का पैसा चाहिए, तो उसे ब्रेंट क्रूड के मुकाबले $8 प्रति बैरल से ज्यादा की छूट देनी होगी और भारत के जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना होगा। भारत की इस आक्रामक और नपे-तुले रुख ने यह साबित कर दिया है कि आज के दौर में भारत किसी भू-राजनीतिक दबाव में नहीं आता, बल्कि अपनी शर्तों पर वैश्विक नीतियां तय करता है।

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