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सरस्वती साइकिल योजना से बेटियों को मिली रफ्तार, नए शिक्षा सत्र की शुरुआत में ही मिला बड़ा तोहफा

सारंगढ़-बिलाईगढ़। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और स्कूल तक सुरक्षित व आसान आवागमन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संचालित सरस्वती साइकिल योजना के तहत इस वर्ष शिक्षा सत्र शुरू होने के एक महीने के भीतर ही पात्र छात्राओं को निःशुल्क साइकिलें वितरित की जा रही हैं। सरकार की इस पहल से दूरदराज के गांवों की छात्राओं को बड़ी राहत मिली है और उनके स्कूल जाने का सफर अब पहले से अधिक आसान हो गया है।

इस योजना के अंतर्गत शासकीय एवं अनुदान प्राप्त विद्यालयों में कक्षा 9वीं में अध्ययनरत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) तथा गरीबी रेखा (BPL) से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों की छात्राओं को निशुल्क साइकिल उपलब्ध कराई जाती है।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सारंगढ़ की कक्षा 9वीं की छात्रा छोटी यादव पहले अपने गांव झरपडीह से करीब तीन किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचती थी। गर्मी, बारिश और लंबी दूरी के कारण पढ़ाई पर भी असर पड़ता था। अब साइकिल मिलने के बाद उसका सफर आसान हो गया है और वह समय पर स्कूल पहुंच रही है।

इसी तरह ग्राम बासीनबहरा की आकांक्षा रात्रे और छात्रावास में रहकर पढ़ाई करने वाली दीक्षा सिदार सहित कई छात्राओं ने बताया कि साइकिल मिलने से रोजाना 2 से 5 किलोमीटर पैदल चलने की परेशानी खत्म हो गई है। अब समय की बचत होगी और पढ़ाई पर अधिक ध्यान देने का अवसर मिलेगा।

योजना का लाभ केवल छात्राओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे पालकों को भी आर्थिक राहत मिली है। जुलाई का महीना खेती-किसानी और धान की बोआई का समय होने के कारण अधिकांश ग्रामीण परिवार अतिरिक्त खर्च उठाने में कठिनाई महसूस करते हैं। ऐसे समय में सरकार द्वारा निशुल्क साइकिल उपलब्ध कराए जाने से परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हुआ है।

जिला शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में सारंगढ़, बरमकेला और बिलाईगढ़ विकासखंडों में साइकिलों की फिटिंग कर विद्यालयों के माध्यम से छात्राओं तक पहुंचाया जा रहा है। अब तक शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सारंगढ़ में 150 पात्र छात्राओं को साइकिल वितरित की जा चुकी है।

सरस्वती साइकिल योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं को स्कूल तक सुगम परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना, ड्रॉपआउट दर में कमी लाना और बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करना है। इस पहल से छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे नियमित रूप से स्कूल पहुंचकर अपनी पढ़ाई जारी रख पा रही हैं।

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