जिला बदर का खेल बंद करो! छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डीएम को सख्त फटकार, डॉक्टरों पर दादागीरी नहीं चलेगी!

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बिलासपुर में एक ऐतिहासिक और तीखा फैसला सुनाते हुए दुर्ग के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) के उस तानाशाही आदेश को हवा में उड़ा दिया, जिसमें एक डॉक्टर को एक साल के लिए जिला बदर (externment) कर दिया गया था। कोर्ट ने सीधे शब्दों में कहा कि सिर्फ कुछ लंबित आपराधिक मामलों के आधार पर किसी डॉक्टर को उसके घर और जिले से बाहर नहीं फेंका जा सकता। कानून-व्यवस्था (Law and Order) और लोक-व्यवस्था (Public Order) के बीच का अंतर समझाते हुए कोर्ट ने साफ किया कि प्रशासनिक अधिकारियों की मनमर्जी और व्यक्तिगत रंजिशें अब किसी की व्यक्तिगत आजादी को पिंजरे में बंद नहीं कर सकतीं।
यह फैसला छत्तीसगढ़ के उन नौकरशाहों के मुंह पर करारा तमाचा है जो खुद को जिले का भगवान समझ बैठते हैं। बिना किसी ठोस और पुख्ता सबूत के, सिर्फ संदेह या राजनीतिक दबाव में आकर ‘जिला बदर’ जैसे गंभीर हथकंडों का इस्तेमाल करना प्रशासनिक गुंडागर्दी के अलावा और कुछ नहीं है। हाई कोर्ट ने साफ किया कि जब तक समाज के लिए कोई वास्तविक और बड़ा खतरा न हो, तब तक किसी भी नागरिक की स्वतंत्रता से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। क्या अब दुर्ग के डीएम और उनके जैसे दूसरे अधिकारी इस अदालती चाबुक से सबक लेंगे, या फिर अपनी कुर्सी की हनक में आम जनता और डॉक्टरों का उत्पीड़न जारी रखेंगे?




