सुलगती उमस के बीच आसमान से बरसेगा ‘कहर’! मौसम विभाग ने जारी किया हाई-वोल्टेज ऑरेंज अलर्ट, 12 जिलों में बिजली गिरने का खौफ!

रायपुर: छत्तीसगढ़ के लोग पिछले कुछ दिनों से जिस चिपचिपी, सुलगती उमस और भीषण गर्मी में उबल रहे थे, उसे शांत करने के लिए मानसून तो लौट रहा है, लेकिन अपने साथ राहत कम और आफत का सायरन ज्यादा लेकर आ रहा है। मौसम विभाग ने आज प्रदेश के मौसम को लेकर एक बेहद खौफनाक और तीखी चेतावनी जारी की है। उत्तर बंगाल की खाड़ी और बांग्लादेश के तट पर बने एक नए चक्रवाती सिस्टम (निम्न दबाव क्षेत्र) ने छत्तीसगढ़ के आसमान पर काले बादलों का डेरा जमाना शुरू कर दिया है। राहत की बात बस इतनी है कि राज्य में जो अब तक सामान्य से 29 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई थी, यह सिस्टम उस सूखे के कलंक को धो सकता है। लेकिन, इसके पीछे छिपा खतरा डराने वाला है।
मौसम वैज्ञानिकों ने सुकमा, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, धमतरी, गरियाबंद, जशपुर, सरगुजा, सूरजपुर और बलरामपुर जैसे 12 महत्वपूर्ण जिलों के लिए सीधे तौर पर ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि इन इलाकों में सिर्फ झमाझम बारिश नहीं होगी, बल्कि 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली खूनी हवाएं और आसमान से मौत बनकर गिरने वाली आकाशीय बिजली (लाइटनिंग) का भयंकर तांडव देखने को मिल सकता है। वहीं, राजधानी रायपुर और दुर्ग-बिलासपुर समेत बाकी बचे जिलों को भी बख्शा नहीं गया है, वहां के लिए भी ‘यलो अलर्ट’ की घंटी बजा दी गई है।
प्रशासनिक अमला भले ही कागजों पर आपदा प्रबंधन की बड़ी-बड़ी डींगें हांक रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि ग्रामीण इलाकों में आकाशीय बिजली से हर साल दर्जनों जानें जाती हैं और बिजली विभाग की लचर व्यवस्था पहली ही बौछार में दम तोड़ देती है। रायपुर में सुबह से ही आसमान में बादलों ने घेराबंदी कर ली है और हल्की बूंदाबांदी से उमस भरी गर्मी को चुनौती तो मिली है, लेकिन अगर इस मानसूनी एक्टिविटी ने अपना विकराल रूप दिखाया, तो प्रदेश के कई नदी-नालों में उफान और निचले इलाकों में जलभराव का संकट खड़ा होना तय है। छत्तीसगढ़ की जनता को अगले 24 से 48 घंटों तक बेहद सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि प्रकृति इस बार किसी पर रहम करने के मूड में नहीं दिख रही है।



