पेट्रोल-डीजल के खेल में आम जनता का गला घोंटा! सरकार ने रातों-रात बढ़ाया टैक्स, जेबों पर डाका डालने की खुली छूट!

देश की सरकार ने एक बार फिर आम जनता के भरोसे की धज्जियां उड़ाते हुए अपनी तिजोरी भरने का क्रूर खेल खेला है। 16 जुलाई 2026 की सुबह देश के नागरिकों के लिए कोई राहत नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक झटका लेकर आई है। सरकार ने वैश्विक स्तर पर चल रहे अमेरिका-ईरान तनाव की आड़ ली और चुपके से निर्यात शुल्क (विंडफॉल टैक्स) के नियमों में वो फेरबदल कर दिया, जिसने सीधे तौर पर तेल कंपनियों और बाजार को आग लगा दी है। सरकारी आदेश के मुताबिक, डीजल के निर्यात पर टैक्स को ₹8.5 से बढ़ाकर सीधे ₹15.5 प्रति लीटर कर दिया गया है। सिर्फ डीजल ही नहीं, बल्कि हवाई ईंधन (ATF) पर भी टैक्स को ₹7.5 से बढ़ाकर ₹14.5 प्रति लीटर करके दो गुना करने की बेशर्म कोशिश की गई है।
सत्ता के गलियारों में बैठे नीति-निर्माता इसे ‘घरेलू अर्थव्यवस्था को सुरक्षित करने का कदम’ बता रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि यह आम आदमी की कमर तोड़ने की एक और सुनियोजित साजिश है। पेट्रोल पर नाममात्र के लिए टैक्स ₹4 से घटाकर ₹2.5 किया गया है, जो भूखे को जीरे का तड़का लगाने जैसा मजाक है। जब वैश्विक बाजार में कच्चा तेल उबलता है, तो उसका पूरा बोझ देश के मध्यमवर्गीय परिवारों पर डाल दिया जाता है। महंगाई के इस नए दौर में ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की सब्जियों, दूध और राशन पर पड़ेगा। यह कोई नीतिगत फैसला नहीं, बल्कि सीधे तौर पर देश की जनता के अधिकारों और उनकी खून-पसीने की कमाई पर डाका है। विपक्ष ने इस फैसले के खिलाफ संसद से लेकर सड़क तक उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।



