रेड सी में हूतियों का खूनी तांडव, लेकिन अमेरिकी चक्रव्यूह में फंसा ईरान; ट्रंप के डर से हिल गई तेहरान की सैन्य कमान!

अमेरिका के सीधे हमलों से बौखलाए ईरान ने अब अपने छद्म गुटों (Proxies) के जरिए युद्ध को नया मोड़ देने की नापाक कोशिश की है, जो उलटी पड़ती दिखाई दे रही है। पिछले 24 घंटों के ताजा घटनाक्रम में, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रेड सी में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर मिसाइलों और सुसाइड ड्रोनों से आत्मघाती हमला किया। इस हमले के बाद बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में हूतियों के खौफ से 10 से अधिक बड़े मालवाहक जहाजों को अपना रास्ता बदलकर अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप से होकर जाने पर मजबूर होना पड़ा है, जिससे वैश्विक तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। ईरान के सेना प्रवक्ता मोहम्मद अकरमीनिया ने सरकारी टेलीविजन पर दहाड़ते हुए धमकी दी है कि अगर अमेरिका ने हमले दोबारा शुरू किए, तो जॉर्डन से लेकर कुवैत तक के सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने श्मशान बना दिए जाएंगे।
लेकिन ईरान का यह आक्रामक बयानबाजी वास्तव में उसकी कमजोरी को छिपाने का एक हताश प्रयास है। सच तो यह है कि अमेरिका ने लाल सागर और हिंद महासागर में ऐसा अभेद्य चक्रव्यूह तैयार कर लिया है कि ईरान चारों तरफ से घिर चुका है। ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने अमेरिका को डिएगो गार्सिया और फेयरफोर्ड जैसे अपने रणनीतिक एयरबेस के इस्तेमाल की खुली छूट दे दी है। इसका मतलब यह है कि अब अमेरिकी बी-1 और बी-52 बमवर्षक सीधे ईरान के परमाणु और मिसाइल ठिकानों को जमींदोज करने के लिए उड़ान भर सकते हैं। कूटनीतिक गलियारों में यह संभावना प्रबल हो गई है कि हूतियों की इस हिमाकत का अंत ईरान के मुख्य सैन्य बंदरगाहों की पूर्ण नाकेबंदी से होगा, जिसके बाद ईरान की आर्थिक रीढ़ पूरी तरह टूट जाएगी।


