मिडिल ईस्ट महासंग्राम के बीच भारत का मास्टरस्ट्रोक! मोदी-नेतनयाहू की गुप्त वार्ता से अमरीका-ईरान सन्न, भारत की शर्तों पर चलेगा नया समीकरण

अमेरिका और ईरान के बीच गहराते युद्ध संकट के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक धमक और रणनीतिक संप्रभुता का लोहा एक बार फिर पूरी दुनिया में मनवाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई बेहद महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय वार्ता ने पश्चिमी एशिया की कूटनीति में भारत के प्रभाव को निर्विवाद रूप से स्थापित कर दिया है। इस वार्ता में भारत ने साफ कर दिया है कि मध्य पूर्व में शांति, सुरक्षा और निर्बाध समुद्री व्यापार भारत की प्राथमिक शर्तों में शामिल है और भारत अपने राष्ट्रीय हितों तथा अपने नागरिकों के कल्याण से कोई समझौता नहीं करेगा।
पिछले 24 घंटों में हुए इस ऐतिहासिक कूटनीतिक घटनाक्रम ने साबित कर दिया है कि आज विश्व के किसी भी बड़े संकट में भारत की भूमिका निर्णायक बन चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइली नेतृत्व के साथ वार्ता के दौरान क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर बल दिया। भारत ने अमेरिका, ईरान और इजराइल तीनों पक्षों को यह सख्त संदेश दिया है कि लाल सागर और फारस की खाड़ी में भारतीय ध्वजवाहक जहाजों की सुरक्षा सर्वोपरि है और भारत के ऊर्जा हितों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कदम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारत के इस निर्भीक और कड़े रुख के सामने वैश्विक शक्तियों को भी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
वैश्विक कूटनीतिज्ञ मानते हैं कि भारत का यह कदम एक महाशक्ति के रूप में उसकी स्थापित छवि को दर्शाता है। भारत ने न केवल इजराइल के साथ अपने रक्षा और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है, बल्कि अरब देशों और ईरान के साथ भी अपने संबंधों को अपनी शर्तों पर संतुलित बनाए रखा है। जब अमेरिका और पश्चिमी देश मध्य पूर्व में युद्ध की लपटों को भड़का रहे हैं, तब भारत अपनी मजबूत सैन्य उपस्थिति और कूटनीतिक चतुराई से पूरे क्षेत्र में अपना दबदबा कायम किए हुए है। भारत की इस आक्रामक और स्पष्ट विदेश नीति ने यह तय कर दिया है कि नया वैश्विक समीकरण अब भारत के दृष्टिकोण के बिना अधूरा रहेगा।


