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PM मोदी से मिलेंगे शरद पवार गुट के 8 सांसद, परिसीमन पर बढ़ी सियासी हलचल

दिल्ली में आज की एक मुलाकात सिर्फ शिष्टाचार नहीं मानी जा रही। शरद पवार गुट के आठ सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने जा रहे हैं और उसी समय कांग्रेस उन्हें महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर अपनी रणनीति स्पष्ट रखने को कह रही है।

NCP (SP) के पास लोकसभा में आठ सांसद हैं। ऐसे में किसी संवैधानिक संशोधन या बड़े संसदीय प्रस्ताव पर उनका रुख राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।

कांग्रेस ने विशेष रूप से कहा है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर लंबित नहीं किया जाना चाहिए।

असली सियासी पेच

परिसीमन का सवाल सिर्फ सीटों की संख्या का नहीं है। यह तय कर सकता है कि भविष्य की लोकसभा में अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक ताकत कितनी होगी।

दक्षिणी राज्यों की पुरानी चिंता रही है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण करने पर अपेक्षाकृत बेहतर जनसंख्या नियंत्रण वाले राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व घट सकता है। इसी कारण परिसीमन लंबे समय से संवेदनशील संवैधानिक मुद्दा रहा है।

Supriya Sule पहले ही कह चुकी हैं कि NCP (SP) प्रस्तावित परिसीमन व्यवस्था पर तभी विचार करेगी जब सभी राज्यों के लिए सीटों में समान अनुपात से वृद्धि की स्पष्ट गारंटी हो।

BJP के सामने चुनौती

केंद्र को सिर्फ संख्या नहीं, भरोसा भी जुटाना होगा। यदि परिसीमन को लेकर व्यापक राजनीतिक सहमति नहीं बनती तो संवैधानिक संशोधन पर बहस बेहद तीखी होगी।

विपक्ष के सामने चुनौती

कांग्रेस और उसके सहयोगियों को भी सिर्फ विरोध की राजनीति से आगे जाना होगा। महिला आरक्षण पर समर्थन और परिसीमन पर विरोध—इन दोनों के बीच स्पष्ट संवैधानिक मॉडल क्या है?

शरद पवार की राजनीति में संवाद और रणनीतिक अस्पष्टता कोई नई बात नहीं है। जुलाई में भी मोदी-पवार मुलाकात ने NDA को लेकर अटकलों को हवा दी थी, हालांकि NCP (SP) ने गठबंधन की चर्चा से इनकार किया था।

आज की मुलाकात का असली महत्व इसलिए है कि यह सिर्फ मोदी और पवार गुट के बीच बातचीत नहीं, बल्कि संसद के भविष्य के राजनीतिक गणित से जुड़ सकती है।

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