अजा एकादशी 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी पौराणिक कथा

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को ‘अजा एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन अजा एकादशी को पापों के नाश और आर्थिक कष्टों से मुक्ति के लिए अत्यंत फलदाई माना गया है।
अजा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त और तिथि
धार्मिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण एकादशी तिथि की शुरुआत और समापन के समय के आधार पर व्रत रखा जाता है। इस दिन सूर्योदय के समय पूजा-अर्चना और तुलसी अर्पण का विशेष महत्व है।
पौराणिक कथा: राजा हरिश्चंद्र को कैसे मिला खोया हुआ राज्य?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने अपने सत्य की परीक्षा में अपना संपूर्ण राज्य, पत्नी और पुत्र तक खो दिया था। जब वे अत्यंत कष्ट में थे, तब गौतम ऋषि के सुझाव पर उन्होंने भाद्रपद कृष्ण एकादशी का विधि-विधान से व्रत रखा। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से उनके सभी पाप और कष्ट दूर हो गए तथा उन्हें उनका खोया हुआ परिवार व राज्य पुनः प्राप्त हो गया।
पूजा विधि और मुख्य नियम
भगवान विष्णु के ऋषिकेश स्वरूप की पूजा: इस दिन भगवान विष्णु के ऋषिकेश रूप की पूजा की जाती है।
तुलसी दल अर्पित करें: श्री हरि को तुलसी पत्र अत्यंत प्रिय हैं, परंतु एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते।
वर्जित कार्य: एकादशी के दिन चावल का सेवन करना और किसी के प्रति मन में द्वेष रखना शास्त्रों में वर्जित बताया गया है।



