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ब्रिज के नीचे रहने वाले बच्चों की सुध लेगा प्रशासन, कलेक्टर ने DEO को दिए निर्देश

रायपुर। विधानसभा क्षेत्र स्थित ब्रिज के नीचे कचरा बीनकर जीवन यापन करने वाले परिवारों और उनके बच्चों की स्थिति को लेकर Fourth Eye News की रिपोर्ट का असर हुआ है। ब्रिज के नीचे रहने वाले कई बच्चे स्कूल से दूर हैं और बेहद कठिन परिस्थितियों में अपना बचपन गुजार रहे हैं। रिपोर्टिंग के दौरान जमीन पर सोए मासूमों की तस्वीर ने भी कई सवाल खड़े किए थे।

Fourth Eye News ने इस मामले को लेकर कलेक्टर से चर्चा की, जिसके बाद उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को बच्चों की स्थिति समझने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

कचरा बीनने में गुजर रहा बचपन

विधानसभा क्षेत्र के ब्रिज के नीचे रहने वाले इन परिवारों के बच्चे अपने माता-पिता के साथ कचरा बीनने का काम करते हैं। इनमें से कई बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं जाते। जिस उम्र में उनके हाथों में किताबें और कॉपियां होनी चाहिए, उस उम्र में उनका बचपन कचरे के बीच संघर्ष करते हुए गुजर रहा है।

रिपोर्टिंग के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ मासूम बेहद खराब परिस्थितियों में जमीन पर सोने को मजबूर हैं। न सुरक्षित आवास, न पढ़ाई की नियमित व्यवस्था और न ही सामान्य बचपन जैसी सुविधाएं।

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Fourth Eye News ने उठाया सवाल

Fourth Eye News ने अपनी रिपोर्ट के माध्यम से सवाल उठाया कि आखिर इन बच्चों का भविष्य कौन संवारेगा? क्या सिर्फ इसलिए कि इनके परिवार कचरा बीनकर जीवन यापन करते हैं, इनके बच्चों का स्कूल जाना और बेहतर भविष्य पाना मुश्किल हो जाना चाहिए?

इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों से अपील की गई कि समाज, प्रशासन, सामाजिक संस्थाएं और जिम्मेदार लोग आगे आएं और इन बच्चों को शिक्षा व बेहतर जीवन से जोड़ने की कोशिश करें।

कलेक्टर ने DEO को दिए निर्देश

मामले को लेकर जब Fourth Eye News ने कलेक्टर से बात की तो उन्होंने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को पूरे मामले की जानकारी लेने और बच्चों की स्थिति को समझने के निर्देश दिए।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ब्रिज के नीचे रहने वाले इन बच्चों की पहचान कैसे की जाती है और जो बच्चे स्कूल से बाहर हैं, उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

सवाल सिर्फ एक जगह का नहीं

यह मामला सिर्फ विधानसभा क्षेत्र के एक ब्रिज के नीचे रहने वाले कुछ बच्चों तक सीमित नहीं है। शहरों में ऐसे कई बच्चे हैं जो गरीबी, बेघर होने और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा से दूर हो जाते हैं।

जरूरत सिर्फ सर्वे करने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की है कि हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचे।

Fourth Eye News इस मुद्दे पर आगे भी नजर बनाए रखेगा और प्रशासन की कार्रवाई के साथ-साथ यह भी जानने की कोशिश करेगा कि आखिर इन मासूमों की जिंदगी में जमीन पर सोने और कचरा बीनने से लेकर स्कूल की किताबों तक का सफर कब और कैसे शुरू होता है।

क्या इन बच्चों के हाथों से कचरे की थैली हटाकर किताबें दी जा सकेंगी? अब इस सवाल का जवाब प्रशासन की आगे की कार्रवाई से मिलेगा।

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