यूपी के गैंगस्टर कानून पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी चोट! कोर्ट ने कहा- ‘Stillborn’, पुलिस के हाथ में बेलगाम ताकत का खतरा

उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 21 अगस्त 2026 को कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एंड एंटी-सोशल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट की वैधता और उसके इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं पर गंभीर सवाल उठाए और कानून को “stillborn” बताते हुए इसके दुरुपयोग की संभावनाओं पर चिंता जताई।
यह कानून अपराध और गैंग से जुड़ी गतिविधियों पर कार्रवाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 1986 में बनाए गए इस कानून में 2015 में संशोधन भी किया गया था। इसके तहत किसी व्यक्ति को “गैंगस्टर” के रूप में वर्गीकृत किए जाने पर न्यूनतम दो वर्ष की सजा का प्रावधान है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी में कानून के तहत पुलिस को मिलने वाली शक्तियों और उनके इस्तेमाल को लेकर चिंता सामने आई। अदालत ने इस बात पर सवाल उठाया कि कानून की धाराओं के इस्तेमाल में कहीं ऐसी स्थिति तो नहीं बन रही, जहां कार्रवाई की शक्ति जरूरत से ज्यादा व्यापक हो जाए।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर कानून अपराध नियंत्रण के लिए एक प्रमुख कानूनी माध्यम रहा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी कानून के तहत दर्ज मामलों और उसके इस्तेमाल के तरीके पर व्यापक चर्चा का आधार बन सकती है।
अदालत की टिप्पणी ने कानून के इस्तेमाल में प्रक्रिया, अधिकार और जवाबदेही के सवाल को फिर सामने ला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह “stillborn” शब्द का इस्तेमाल किया, उसने इस कानून की वैधानिकता और उसके संभावित दुरुपयोग को लेकर बहस को और तीखा कर दिया है।
21 अगस्त की कानूनी खबरों में यह फैसला प्रमुख रहा। सुप्रीम कोर्ट से जुड़े घटनाक्रम के अनुसार अदालत ने कानून के इस्तेमाल में संभावित दुरुपयोग को गंभीरता से देखा।
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