Tehran buckles under Trump's dire threat! Iran, having set out to turn Hormuz into a powder keg, is now forced to choose between 'surrender' and a 'deal'!

दुनिया में अमेरिका की दादागिरी पर सवाल, ट्रंप की विदेश नीति घिरी; भारत भी दबाव से अछूता नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति पर 22 अगस्त 2026 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक मध्यावधि चुनावों से पहले ट्रंप की विदेश नीति का रिकॉर्ड कई अधूरे और उलझे हुए संकटों से घिरा है। ईरान के साथ टकराव लंबा खिंच रहा है और यूक्रेन तथा गाजा से जुड़े कूटनीतिक प्रयास भी निर्णायक परिणाम देने में सफल नहीं हुए हैं।

इस अमेरिकी नीति का असर भारत पर भी पड़ता है। भारत और अमेरिका के संबंध रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन रूस के साथ भारत के ऊर्जा संबंध और अमेरिकी प्रतिबंध नीति के कारण दोनों देशों के बीच मतभेद पहले भी सामने आ चुके हैं।

भारत ने अपनी विदेश नीति में रणनीतिक स्वायत्तता को प्रमुखता दी है। रूस से तेल खरीदने का मुद्दा इसका बड़ा उदाहरण रहा है। Reuters के अनुसार भारत रूसी तेल का प्रमुख खरीदार रहा है और इसी वजह से अमेरिकी दबाव तथा वैश्विक प्रतिबंध नीति के बीच नई दिल्ली को लगातार संतुलन बनाना पड़ा है।

दूसरी ओर अमेरिका खुद ईरान के साथ संघर्ष में फंसा हुआ है। 22 अगस्त की Reuters रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच नए प्रतिबंधों से पहले दोनों पक्षों की बयानबाजी बेहद आक्रामक बनी हुई है।

भारत के लिए यह स्थिति सीधा संदेश देती है—विश्व राजनीति में किसी एक शक्ति पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर भारत को लगातार स्वतंत्र रणनीतिक फैसले लेने पड़ सकते हैं।

अमेरिकी दबाव हो या रूस-यूक्रेन युद्ध, भारत की चुनौती यही है कि राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखते हुए बदलती वैश्विक ताकतों के बीच अपनी जगह मजबूत रखी जाए।

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