स्टंट के नाम पर टॉर्चर? ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ के रबर बुलेट टास्क ने हिलाकर रख दी कंटेस्टेंट्स की रूह!

कलर्स टीवी का सबसे लोकप्रिय और एड्रेनालाईन पंप करने वाला स्टंट आधारित रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी सीजन 15’ इन दिनों सुर्खियों के केंद्र में है। शो में इस बार स्टंट्स का लेवल इतना खतरनाक और खौफनाक कर दिया गया है कि नामी-गिरामी टीवी स्टार्स की चीखें निकल रही हैं। हाल ही में हुए एक रबर बुलेट और पैलेट गन (Pellet Gun) टास्क ने शो के अंदर और बाहर भूचाल ला दिया है। लोकप्रिय अभिनेता करण वाही और अविनाश मिश्रा ने इस टास्क के बाद जो खुलासे किए हैं, उसने दर्शकों को भी सकते में डाल दिया है।
शो में एक ऐसा क्रूर स्टंट जिसमें रबर बुलेट और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया।
अभिनेता करण वाही का चौकाने वाला बयान- “टास्क के बाद मेरा दिमाग सुन्न हो गया था”।
अविनाश मिश्रा का स्टंट पूरा करने के बाद कैमरे पर छलका दर्द और इमोशनल ब्रेकडाउन।
टीवी पर परोसे जा रहे खतरनाक स्टंट्स की नैतिकता और सुरक्षा मानकों को लेकर उठ रहे सवाल।
वायरल होने की असली वजह
टीवी रियलिटी शोज में हमेशा से टीआरपी के लिए स्टंट्स को खतरनाक बनाया जाता रहा है, लेकिन जब करण वाही और अविनाश मिश्रा जैसे लोकप्रिय चेहरे कैमरे पर यह स्वीकार करते हैं कि इस टास्क ने उन्हें अंदर से हिला दिया, तो फैंस के बीच यह एक बड़ी बहस बन जाती है। सोशल मीडिया पर इस टास्क के क्लिप्स और सितारों के इंटरव्यूज मिलियंस में व्यूज बटोर रहे हैं।
वायरल दावे और वास्तविक तथ्य
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स यह कयास लगा रहे थे कि क्या शो में असली हथियारों या गोलियों का इस्तेमाल किया गया है। वास्तविक तथ्य यह है कि: यह एक डिजाइन किया गया फिजिकल इम्पैक्ट टास्क था जिसमें रबर प्रोजेक्टाइल या पैलेट गन जैसी तकनीक का इस्तेमाल खिलाड़ियों के सहनशक्ति (Stamina & Pain Tolerance) की परीक्षा लेने के लिए किया गया था। हालांकि यह जानलेवा नहीं था, लेकिन इससे होने वाला शारीरिक दर्द और मानसिक तनाव इतना अधिक था कि खिलाड़ियों के होश उड़ गए।
जनता पर असर
जनता और शो के फैंस दो धड़ों में बंट गए हैं। एक तरफ जहां युवाओं को यह रोमांचक और साहसिक लग रहा है, वहीं दूसरी तरफ कई दर्शक यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या मनोरंजन के नाम पर कलाकारों की शारीरिक सुरक्षा के साथ इस हद तक खिलवाड़ होना चाहिए।
क्या स्टंट आधारित शोज में सुरक्षा की कोई लाल रेखा होनी चाहिए या टीआरपी के लिए हर हद पार करना जायज है?


