देश की ताज़ा खबरें | Fourth Eye News

क्या रिजर्व बैंक के कमरों में बैठने वाले हुक्मरानों को कभी आम आदमी की रसोई का तापमान महसूस होता है?

rbi-repo-rate-unchanged-inflation-impact-2026

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला तो सुना दिया है, और इसे ‘विकास और स्थिरता’ का नाम भी दे दिया है। लेकिन सवाल यह है कि इस कागजी स्थिरता का जमीन पर क्या असर है? क्या आम जनता की थाली से महंगाई का दानव गायब हो गया है? आंकड़े चाहे जो भी दावा करें, हकीकत यह है कि खाद्य पदार्थों और ईंधन के दामों ने मध्यम और गरीब वर्ग की कमर तोड़कर रख दी है।

सरकार और केंद्रीय बैंक वैश्विक अनिश्चितताओं और एल नीनो का रोना रोकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। लेकिन उस दिहाड़ी मजदूर और नौकरीपेशा इंसान से पूछिए जो हर महीने बढ़ती महंगाई के बीच अपने बच्चों की फीस और घर का खर्च चलाने के लिए संघर्ष कर रहा है। रेपो रेट स्थिर रहने का मतलब यह कतई नहीं है कि आपके लोन की किस्तें कम हो गई हैं या बाजार में सब्जियां सस्ती बिक रही हैं। उलटे, महंगाई की मार ने आम आदमी की बचत को शून्य कर दिया है।

जब तक नीतियां सिर्फ कॉरपोरेट सेक्टर और शेयर बाजार के हरे निशान देखकर बनाई जाएंगी, तब तक देश का आम नागरिक पिसता रहेगा। क्या सरकार के पास इस बात का कोई जवाब है कि आम आदमी की असली आय कब बढ़ेगी? आंकड़ों की इस बाजीगरी से जनता का पेट नहीं भरने वाला। Fourth Eye News का सवाल सीधा है—विकास के इस झूठे आवरण के पीछे आखिर कब तक आम जनता के आंसुओं को छुपाया जाता रहेगा?

ये खबर भी पढ़ें—:

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button