सिंधु जल संधि विवाद पर भारत का कड़ा रुख, मध्यस्थता फैसले को बताया अवैध

भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल विवाद में 1 सितंबर को नया मोड़ आया है। भारत सरकार ने सिंधु जल संधि से जुड़े एक मध्यस्थता फैसले को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
भारत सरकार ने सिंधु जल संधि से संबंधित तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को अवैध बताते हुए उसकी वैधता पर सवाल उठाए हैं। सरकार का कहना है कि इस मामले में गठित मध्यस्थता तंत्र को भारत के संप्रभु फैसलों पर अधिकार नहीं है।
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच जल संसाधनों के बंटवारे से जुड़ा एक महत्वपूर्ण समझौता है। हाल के वर्षों में इस संधि से जुड़े प्रावधानों और परियोजनाओं को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद लगातार बढ़े हैं।
भारत के ताजा रुख से साफ है कि सरकार इस मुद्दे पर अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में यह मामला भारत-पाकिस्तान संबंधों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंचों पर चर्चा का विषय बन सकता है।
सिंधु जल विवाद केवल पानी का मुद्दा नहीं, बल्कि भारत-पाकिस्तान के रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों से भी जुड़ा है। भारत के ताजा बयान के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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