अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव! पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा बने पहले CEO, 3 नए ट्रस्टी भी शामिल

अयोध्या के राम मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने का ऐलान किया है। करीब चार दशक तक भारतीय वायुसेना में सेवाएं देने वाले जीतेंद्र मिश्रा अब राम मंदिर के प्रशासन, सुरक्षा और बड़े स्तर के संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे।
जीतेंद्र मिश्रा को उनके लंबे सैन्य और प्रशासनिक अनुभव के कारण इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना गया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व किया था। सैन्य सेवाओं में उनके योगदान के लिए उन्हें सर्वोच्च युद्ध सेवा मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश के देवरिया से ताल्लुक रखने वाले मिश्रा के पास करीब 39 वर्षों का वायुसेना अनुभव है।
राम मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और प्रशासनिक गतिविधियों को देखते हुए उनके सैन्य अनुभव को बेहद अहम माना जा रहा है।
ट्रस्ट ने इसके साथ ही तीन नए सदस्यों की नियुक्ति भी की है। इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं। निर्मला यादव की नियुक्ति खास मानी जा रही है, क्योंकि वह राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली महिला ट्रस्टी होंगी।
मदन मोहन पांडेय राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में रामलला पक्ष की कानूनी टीम से जुड़े रहे हैं और हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मामले की पैरवी में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं महेश भागचंदका धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के साथ-साथ राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं।
ट्रस्ट में यह बड़ा फेरबदल ऐसे समय किया गया है, जब कुछ महीने पहले मंदिर में चढ़ावे से जुड़े चोरी के मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। मामले में कार्रवाई के बाद कई आरोपी जेल भेजे गए थे और इसके बाद ट्रस्ट के भीतर भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले।
अब पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन को और अधिक मजबूत, व्यवस्थित और पेशेवर बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में उनकी भूमिका मंदिर की सुरक्षा, श्रद्धालु सुविधाओं और विशाल प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण होगी।




