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सावन में कांवड़ियों को बड़ी सौगात, बूढ़ा महादेव में बनेगा आधुनिक विश्राम गृह

रायपुर। पवित्र सावन माह में अमरकंटक से मां नर्मदा का जल लेकर कठिन और दुर्गम मार्गों से पदयात्रा कर कवर्धा के बूढ़ा महादेव मंदिर पहुंचने वाले हजारों कांवड़ियों के लिए बड़ी राहत की घोषणा हुई है। श्रद्धालुओं की सुविधा और विश्राम को ध्यान में रखते हुए पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर परिसर में कांवड़िया विश्राम गृह (डोम) का निर्माण किया जाएगा। लगभग 1 करोड़ 54 लाख 72 हजार रुपये की लागत से बनने वाले इस भवन का भूमिपूजन उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर किया।

भूमिपूजन से पहले उपमुख्यमंत्री ने बूढ़ा महादेव मंदिर में जलाभिषेक कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम में सांसद संतोष पाण्डेय सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और श्रद्धालु मौजूद रहे।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बूढ़ा महादेव केवल कवर्धा ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की आस्था और संस्कृति का प्रमुख केंद्र है। सावन में कांवड़ियों की कठिन तपस्या को देखते हुए उनके ठहराव और सुविधाओं के लिए यह विश्राम गृह एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आरामदायक व्यवस्था मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि अमरकंटक क्षेत्र में भी कांवड़ियों और श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की व्यवस्था हेतु भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके साथ ही भोरमदेव क्षेत्र के विकास को नई दिशा देते हुए 146 करोड़ रुपये की लागत से भोरमदेव कॉरिडोर निर्माण की घोषणा की गई। यह कॉरिडोर उज्जैन और बनारस की तर्ज पर विकसित होगा, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

सांसद संतोष पाण्डेय ने कहा कि कांवड़िया विश्राम गृह का निर्माण पूरे क्षेत्र के लिए आस्था और गर्व का विषय है। पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर को ‘छोटा काशी’ के रूप में पहचान मिली है और यहां का आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को विशेष अनुभूति देता है।

नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी ने बताया कि सावन माह में यह भवन विशेष रूप से कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेगा, जबकि शेष समय में इसका उपयोग सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों के लिए किया जाएगा। यह सुविधा वर्षों से प्रतीक्षित थी, जो अब साकार होने जा रही है।

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