देश की ताज़ा खबरें | Fourth Eye News

50% टैरिफ की सनक के बाद अब ‘मिशन 500’ का नाटक! ट्रंप की व्यापारिक ब्लैकमेलिंग के सामने झुका भारत या खेला बड़ा दांव?

अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वाशिंगटन में आतिशबाजी हो रही है, लेकिन भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों के गलियारों में तनाव की बर्फ अभी पूरी तरह पिघली नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और सनक भरे फैसलों ने पिछले साल भारत पर 50% तक के भारी टैरिफ ठोक दिए थे, जिससे दोनों देशों के रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। अब उसी तनाव को दबाने के लिए दोनों देश ‘मिशन 500’ यानी 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का नया झुनझुना लेकर आए हैं।

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दावा किया है कि भारत-अमेरिका व्यापक व्यापार समझौता (BTA) अपने आखिरी चरण में है और सिर्फ 1% काम बाकी है। लेकिन इस आक्रामक व्यापारिक कूटनीति के पीछे का कड़वा सच यह है कि अमेरिका भारत को एक रणनीतिक साझेदार कम और अपनी मर्जी से चलने वाला बाजार ज्यादा समझता है। भारत द्वारा रूस से तेल की खरीद जारी रखने और ईरान के चाबहार पोर्ट में निवेश करने से चिढ़े अमेरिका ने पहले भारत को आर्थिक रूप से चोट पहुंचाने की कोशिश की। जब भारत ने झुकने से इनकार कर दिया, तब अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और उनके आर्थिक दूतों को नई दिल्ली दौड़ना पड़ा।

फरवरी 2026 में हुए अंतरिम समझौते के तहत अमेरिकी टैरिफ को 50% से घटाकर 18% तो किया गया है, लेकिन इसके बदले वाशिंगटन ने भारत पर अर्धचालक (Semiconductors), कृषि और महत्वपूर्ण खनिजों की आक्रामक खरीद का भारी दबाव बनाया है। भारतीय कूटनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रंप प्रशासन पर भविष्य में भरोसा किया जा सकता है? भारत ने क्रिटिकल टेक्नोलॉजी (iCET) और ‘क्वाड’ (Quad) के मंचों पर अमेरिका का साथ चीन को घेरने के लिए तो दिया है, लेकिन व्यापार के मोर्चे पर भारत ने भी साफ कर दिया है कि वह अमेरिकी ब्लैकमेलिंग के आगे अपनी कृषि और घरेलू उद्योगों की बलि नहीं चढ़ाएगा। यह समझौता कोई खैरात नहीं, बल्कि भारत के कड़े आर्थिक प्रतिरोध का नतीजा है जिसने ट्रंप के अहंकार को तोड़ने पर मजबूर किया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button