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यूरोप के कार्बन टैक्स पर BRICS का पलटवार, भारत समेत 9 देशों ने EU की नीति पर उठाए सवाल

यूरोपीय संघ की कार्बन सीमा से जुड़ी व्यापार नीति के खिलाफ BRICS देशों ने विरोध दर्ज कराया है। BRICS के पर्यावरण मंत्रियों ने यूरोपीय संघ के Carbon Border Tax का विरोध किया है। इस समूह में भारत समेत नौ विकासशील अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं।

बैठक में विकासशील देशों के हितों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। BRICS देशों ने अमीर देशों से जलवायु वित्त उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। कार्बन सीमा कर को लेकर विकासशील देशों की चिंता यह है कि इस तरह की व्यापारिक व्यवस्था उनके उत्पादों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।

भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यूरोपीय बाजार भारतीय उद्योग और निर्यात के लिए बड़ा बाजार है। यदि कार्बन से जुड़े शुल्क और नियम बढ़ते हैं तो भारतीय निर्यातकों पर अतिरिक्त लागत का दबाव आ सकता है।

BRICS मंच पर भारत लंबे समय से विकासशील देशों के हितों, जलवायु वित्त और व्यापार में समान अवसर की मांग करता रहा है। ऐसे में यूरोपीय संघ की कार्बन सीमा नीति के खिलाफ समूह का रुख भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है।

यह मामला सिर्फ पर्यावरण नीति का नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार का भी है। विकसित देशों और विकासशील देशों के बीच जलवायु जिम्मेदारी और आर्थिक लागत को लेकर पहले से मतभेद हैं।

BRICS देशों का विरोध इस बहस को और तेज कर सकता है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की जिम्मेदारी किस तरह साझा की जाए और उसके नाम पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में नए अवरोध न खड़े हों।

भारत की चिंता साफ है कि पर्यावरणीय नियमों के नाम पर विकासशील देशों के निर्यात और आर्थिक विकास पर असमान दबाव नहीं पड़ना चाहिए।

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