गाजा में फिर मौतों का सिलसिला, भारत का रुख साफ! इजरायल के बीच मानवीय मदद और शांति पर जोर

गाजा में इजरायली हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बना हुआ है। हाल की रिपोर्टों में गाजा में बच्चों सहित लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। 24 अगस्त को इजरायली हमलों और गोलीबारी में दो बच्चों समेत कई फिलिस्तीनियों की मौत की रिपोर्ट सामने आई। इससे गाजा में मानवीय स्थिति को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
भारत ने गाजा संकट के बीच फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता भेजने का रुख बनाए रखा है। भारत का आधिकारिक रुख दो-राज्य समाधान और फिलिस्तीनी लोगों की मानवीय जरूरतों के समर्थन पर केंद्रित रहा है। भारत ने 2026 में भी गाजा शांति योजना के समर्थन की पुष्टि की है।
भारत का रुख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली के इजरायल के साथ मजबूत रणनीतिक संबंध हैं, लेकिन फिलिस्तीन के मुद्दे पर भी भारत लंबे समय से अपने समर्थन की बात करता रहा है। ऐसे में गाजा संकट भारत की विदेश नीति के लिए बेहद संवेदनशील संतुलन का विषय है।
इजरायल और हमास के बीच शांति प्रक्रिया को लेकर भी लगातार खींचतान बनी हुई है। अगस्त में इजरायल की ओर से अमेरिकी प्रस्ताव पर आपत्ति की खबरें सामने आई थीं, जबकि हमास ने प्रस्ताव पर अपनी स्थिति बनाए रखी थी।
भारत के लिए सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष क्षेत्रीय स्थिरता के साथ-साथ ऊर्जा आपूर्ति और भारतीय नागरिकों के हितों को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए नई दिल्ली के लिए शांति, मानवीय सहायता और कूटनीतिक समाधान पर जोर देना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
गाजा में लगातार सामने आ रही मौतों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बढ़ाया है। भारत की नीति में एक तरफ इजरायल के साथ रणनीतिक संबंध हैं तो दूसरी तरफ फिलिस्तीन के लिए मानवीय सहायता और शांति प्रक्रिया का समर्थन भी जारी है। यही संतुलन आने वाले समय में भारतीय कूटनीति की सबसे बड़ी परीक्षा बन सकता है।
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