छत्तीसगढ़ न्यूज़ | Fourth Eye News

छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की नई इबारत

रायपुर। छत्तीसगढ़ ने स्त्री-पुरुष समानता की मिसाल पहले ही कायम की थी, लेकिन अब आर्थिक समानता की दिशा में भी एक बड़ा कदम उठाया गया है। नई सरकार के आने के बाद महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं — अब माँ और बहनें खुद अपने फैसले ले रही हैं, छोटे-छोटे खर्चों के लिए किसी पर निर्भर नहीं हैं।

महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को उनके श्रम और सामाजिक योगदान के लिए सम्मान मिल रहा है। वहीं आजीविकामूलक योजनाएं उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता की ओर प्रेरित कर रही हैं। इस सशक्तिकरण से आधी आबादी को न सिर्फ सम्मान मिला है, बल्कि छत्तीसगढ़ के विकास की बुनियाद और मजबूत हुई है।

महिला सशक्तिकरण के 19 महीने – बदलाव की रफ्तार तेज

राज्य सरकार ने बीते 19 महीनों में महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक और स्वास्थ्य स्तर पर सशक्त करने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। योजनाओं की पारदर्शिता और समय पर लाभ मिलने से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।

प्रमुख योजनाएं और उपलब्धियां:

🔸 महतारी वंदन योजना –
हर विवाहित महिला को ₹1,000 प्रतिमाह सीधे बैंक खाते में।
अब तक ₹12,376.19 करोड़ का भुगतान 69.15 लाख महिलाओं को।

🔸 महतारी सदन –
179 केंद्रों के निर्माण के लिए ₹52.20 करोड़ की मंजूरी।
प्रशिक्षण, बैठकों और सामुदायिक कार्यों का केंद्र।

🔸 उद्यमिता की ओर कदम:

सिलाई मशीन सहायता योजना – ₹7,900 की सहायता

दीदी ई-रिक्शा योजना – ₹1 लाख की अनुदान राशि

मिनीमाता महतारी जतन योजना – गर्भवती महिलाओं को ₹20,000

नोनी सशक्तिकरण योजना – श्रमिकों की बेटियों को ₹20,000

महतारी शक्ति ऋण योजना – बिना जमानत ₹25,000 का ऋण

सक्षम योजना – 3% ब्याज दर पर ₹2 लाख तक ऋण

एनआरएलएम – ₹800 करोड़ का प्रावधान, “लखपति महिला”, “ड्रोन दीदी” जैसी पहलें

🔸 महिला सुरक्षा:

नवाबिहान योजना – घरेलू हिंसा पीड़ितों को सहायता

सखी वन स्टॉप सेंटर – 27 जिलों में, 24×7 सेवाएं

महिला हेल्पलाइन 181, डायल 112 – संकट में त्वरित सहायता

🔸 स्वच्छता और शिक्षा:

शुचिता योजना – 2,000 स्कूलों में नैपकिन वेंडिंग मशीनें

साइकिल वितरण योजना – छात्राओं के लिए ₹50 करोड़ का प्रावधान

🔸 पोषण और स्वास्थ्य:

गर्भवती और धात्री महिलाओं को पोषण पूरक

पोषण पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से सहायता

🔸 उत्पादों को बाजार:

यूनिटी मॉल, नवा रायपुर – ₹200 करोड़ की लागत से निर्माण

जशप्योर ब्रांड – आदिवासी महिलाओं के वन-आधारित उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पहचान

बजट और प्राथमिकता

2025-26 में महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए ₹8,245 करोड़ का बजट आवंटित। यह राशि पोषण, स्वास्थ्य, ऋण, सुरक्षा और सम्मान से जुड़ी योजनाओं पर खर्च की जाएगी।

नेतृत्व की सोच

मुख्यमंत्री का मानना है कि “महिला सशक्तिकरण केवल घोषणाओं से नहीं, धरातल पर बदलाव से संभव है।”
वहीं, महिला एवं बाल विकास मंत्री कहती हैं, “हर पात्र महिला तक योजना का लाभ पारदर्शी और समयबद्ध रूप से पहुँचना हमारी प्राथमिकता है।”

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button