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लाल किले पर गूंजा छत्तीसगढ़ का गेंड़ी नृत्य, दुनिया ने देखा ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’

रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोककला ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। बिलासपुर जिले की सांस्कृतिक संस्था लोक श्रृंगार भारती के गेंड़ी लोकनृत्य दल ने नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला परिसर में ऐसा रोमांचक प्रदर्शन किया कि 180 देशों से आए प्रतिनिधि मंत्रमुग्ध हो गए।

यह प्रस्तुति यूनेस्को और भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के आमंत्रण पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय समारोह के दौरान हुई। गेंड़ी नृत्य की साहसिक, ऊर्जावान और भावपूर्ण शैली ने छत्तीसगढ़ की परंपरागत लोकसंस्कृति को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कलाकारों को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह प्रस्तुति राज्य की सांस्कृतिक विरासत पर गर्व का विषय है। वहीं केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत कलाकारों के जज्बे से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने मंच से “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” का नारा दिया।

समारोह का एक ऐतिहासिक क्षण तब आया जब भारत के महापर्व दीपावली को यूनेस्को द्वारा विश्व सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी गई। इस अवसर पर गेंड़ी नृत्य दल की प्रस्तुति को विशेष सराहना मिली।

मुख्य गायक व नृत्य निर्देशक अनिल गढ़ेवाल के नेतृत्व में दल ने संतुलन, साहस और सामूहिक तालमेल का अद्भुत प्रदर्शन किया। “काट ले हरियर बांसें” गीत और मांदल, बांसुरी व हारमोनियम की सुर-लहरियों पर विदेशी मेहमान भी झूम उठे।

कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित कई विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। यूनेस्को के महानिदेशक डॉ. खालिद एन. एनानी समेत अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने कलाकारों के साथ स्मृति चित्र भी लिए।

इस प्रस्तुति ने न केवल दर्शकों को रोमांचित किया, बल्कि छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्र पर एक सशक्त पहचान भी दिलाई।

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