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भारत की कूटनीतिक जीत: अमेरिका और इजरायल ने माना भारत का लोहा, पश्चिमी दबाव को खारिज कर भारत ने तय की शर्तें

पश्चिम एशिया में जारी भीषण जंग के बीच भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक ताकत का डंका पूरी दुनिया में बज रहा है। बीते 24 घंटों में वाशिंगटन और यरूशलम के शीर्ष नेतृत्व ने भारत के साथ आपातकालीन उच्चस्तरीय वार्ता की है। अमेरिका और इजरायल दोनों ही महाशक्तियों ने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को न केवल स्वीकार किया है, बल्कि मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए भारत को एकमात्र विश्वसनीय और निर्णायक मध्यस्थ के रूप में मान्यता दी है।

विदेश मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, बीते 24 घंटों के घटनाक्रम में पश्चिमी देशों की ओर से भारत पर ईरान के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को पूरी तरह खत्म करने का परोक्ष दबाव बनाने की कोशिश की गई थी। लेकिन भारत के कड़े और सख्त रुख ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को बैकफुट पर ला दिया। भारत ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि देश का राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च है और भारत अपनी विदेश नीति के फैसले किसी तीसरे देश के इशारे पर नहीं लेगा। इसके विपरीत, भारत ने आई2यू2 (I2U2) और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) के तहत अपनी शर्तों को मजबूती से पेश किया।

इतना ही नहीं, इजरायल के साथ हाल ही में उन्नत हुई ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ के तहत भारत ने अपनी रक्षा सह-उत्पादन प्राथमिकताओं को और मजबूत किया है। इजरायल ने भारत के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत अपनी आधुनिकतम रक्षा और एआई प्रौद्योगिकियों के निर्बाध हस्तांतरण पर सहमति जताई है।

वैश्विक राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि पिछले 24 घंटों का यह घटनाक्रम भारत की ‘राष्ट्र प्रथम’ नीति की सबसे बड़ी जीत है। एक तरफ जहां अमेरिका और ईरान के बीच भयंकर नफरत और बारूद की जंग जारी है, वहीं भारत अपनी शर्तों पर दोनों गुटों और दुनिया के अन्य हिस्सों से अपने व्यापारिक और रक्षा संबंधों को संचालित कर रहा है। भारत का यह रूप यह साबित करता है कि आज का भारत विश्व पटल पर किसी के पीछे चलने वाला देश नहीं, बल्कि वैश्विक एजेंडा तय करने वाला नया ‘सुपरपावर’ है।

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