महासमुंद में डेयरी क्रांति: रोजाना 34 हजार लीटर दूध से बढ़ रही किसानों की आय

महासमुंद जिले में खेती के साथ पशुपालन को बढ़ावा देकर ग्रामीणों की आय बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय काम किया जा रहा है। जिले में करीब 1.91 लाख पशुधन उपलब्ध है और दुग्ध उत्पादन का क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है।
देवभोग दुग्ध महासंघ प्रतिदिन लगभग 17,200 लीटर दूध खरीद रहा है, जबकि विभिन्न निजी डेयरियां करीब 17 हजार लीटर दूध का संग्रह कर रही हैं। इस तरह जिले से हर दिन लगभग 34 हजार लीटर दूध का विपणन किया जा रहा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है।
दूध उत्पादकों को बाजार से जोड़ने के लिए जिले में 156 सक्रिय दुग्ध सहकारी समितियां संचालित हैं। इसके अलावा 30 नई समितियों के गठन की तैयारी भी चल रही है। पशुपालकों को हरा चारा उत्पादन, साईलेज निर्माण और उन्नत नस्ल के पशुओं के पालन के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से बेहतर नस्ल की दुधारू गायों की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे भविष्य में दुग्ध उत्पादन क्षमता में और वृद्धि की उम्मीद है। वहीं महिला स्व-सहायता समूहों को 50 प्रतिशत अनुदान पर गाय उपलब्ध कराकर स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। अब तक 94 महिला हितग्राहियों को इसका लाभ मिल चुका है।
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की योजना के तहत 50 आदिवासी परिवारों को भी डेयरी व्यवसाय से जोड़ने की पहल की जा रही है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप महासमुंद में दुग्ध उत्पादन, विपणन और ग्रामीण आजीविका के नए अवसर लगातार मजबूत हो रहे हैं।




