राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के एक बड़े हिस्से में आज सरकार ने अघोषित डिजिटल इमरजेंसी लागू कर दी है। विरोध प्रदर्शन को दुनिया की नज़रों से ओझल करने और सच को दबाने के नापाक मंसूबों के तहत केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर संवेदनशील इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। जनपथ और कर्तव्य पथ के आसपास के इलाकों को डिजिटल रूप से ब्लैकआउट कर दिया गया है ताकि कोई भी शख्स ज़मीनी हकीकत और पुलिसिया बर्बरता के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा न कर सके।
सरकार का यह कदम साफ तौर पर यह दर्शाता है कि वह नागरिकों के सूचना पाने के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने में जुटी है। पुलिस और खुफिया तंत्र के इशारे पर उठाए गए इस कदम ने देश के लोकतंत्र को डिजिटल युग में भी अंधकार की तरफ धकेल दिया है।
सच्चाई की आवाज़ को तकनीकी जंजीरों में जकड़ने की यह कोशिश भले ही कुछ समय के लिए परदे डालने का काम करे, लेकिन जनता के बीच सुलग रहे इस असंतोष की आग को डिजिटल पहरेदारी से कभी नहीं छिपाया जा सकता।
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