फारस की खाड़ी में बारूद का विस्फोट: अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का भीषण ड्रोन हमला, अमेरिका और इजरायल का संयुक्त महा-पलटवार

पश्चिम एशिया में पिछले 24 घंटों के भीतर जारी खूनी जंग ने अत्यंत घातक मोड़ ले लिया है। फारस की खाड़ी और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर ईरान ने दर्जनों आत्मघाती ड्रोनों और घातक ‘खैबर शेकन’ बैलिस्टिक मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले झोंक दिए हैं। अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली को भेदते हुए हुए इन हमलों के बाद वाशिंगटन और तेल अवीव में हड़कंप मच गया है। इसके जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली रक्षा बल (IDF) ने संयुक्त रूप से ईरान के मुख्य ऊर्जा ढांचों और मिसाइल असेंबली साइटों पर अब तक का सबसे भीषण हवाई हमला शुरू कर दिया है।
पेंटागन के सूत्रों के अनुसार, बीते 24 घंटों में ईरानी समर्थित मिलिशिया और ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में गश्त लगा रहे अमेरिकी नौसैनिक बेड़ों पर सीधा हमला बोलने का दुस्साहस किया। ईरान का दावा है कि उसने कुवैत और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद अमेरिकी सैन्य परिसरों को निशाना बनाकर करारा सबक सिखाया है। हालांकि, अमेरिका ने इस हिमाकत का जवाब देने में एक सेकंड की भी देरी नहीं की। अमेरिकी बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बमवर्षक और इजरायली एफ-35 लड़ाकू विमानों ने ईरान के दक्षिणी और मध्य क्षेत्रों में मौजूद मिसाइल डिपो और रिफाइनरियों पर अनगिनत बम बरसाए हैं।
वाशिंगटन से जारी बेहद सख्त चेतावनी में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि “ईरान को उसकी हर एक गुस्ताखी की ऐसी कीमत चुकानी पड़ेगी जो उसने इतिहास में कभी नहीं सोची होगी।” सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि पिछले 24 घंटों का यह घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म कर चुका है। दोनों देश अब ‘ऑल-आउट वॉर’ यानी आर-पार की जंग के मुहाने पर खड़े हैं।
इस भयंकर सैन्य टकराव के कारण फारस की खाड़ी में उड़ानों और जहाजों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो चुकी है। खाड़ी के देशों में स्थिति बेहद नाजुक हो गई है और पूरा क्षेत्र एक विशाल बारूद के ढेर पर बैठा नजर आ रहा है। अमेरिकी सेना ने क्षेत्र में अतिरिक्त एयरक्रॉफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात करने के आदेश जारी कर दिए हैं, जिससे साफ है कि आने वाले कुछ घंटे और भी अधिक विनाशकारी साबित होने वाले हैं।



