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मेहनत और योजना का कमाल, सरसों से बढ़ी किसान की आय

रायपुर। भारत कृषि प्रधान देश है, जहाँ खेती सिर्फ रोज़गार नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव भी है। छत्तीसगढ़ में किसान आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर नई ऊँचाइयों तक पहुँच रहे हैं।
मुंगेली जिले के विकासखंड लोरमी अंतर्गत ग्राम बिंदावल की कृषक महिला बजरहीन बाई गोंड़ इसकी जीवंत मिसाल हैं। पिछले 30 वर्षों से खेती कर रहीं बजरहीन बाई का परिवार पूरी तरह कृषि पर निर्भर है।

वर्ष 2025-26 में उन्होंने कृषि विभाग की योजना के तहत सरसों फसल प्रदर्शन कार्यक्रम में भाग लिया। योजना के अंतर्गत उन्हें 1.970 हेक्टेयर भूमि के लिए उन्नत सरसों बीज उपलब्ध कराया गया। इसके साथ ही खाद, रोग-व्याधि नियंत्रण किट और कृषि वैज्ञानिकों का नियमित मार्गदर्शन भी मिला।

आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सलाह का असर उनकी फसल में साफ नजर आया। असिंचित क्षेत्र में 1 हेक्टेयर से उन्हें 16 क्विंटल सरसों का उत्पादन मिला, जो क्षेत्र की औसत उपज से कहीं अधिक है। बेहतर उत्पादन से उनकी आय में बढ़ोतरी हुई और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।

बजरहीन बाई का कहना है कि कृषि विभाग की योजनाओं ने उन्हें सिर्फ अच्छा उत्पादन ही नहीं दिया, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की राह भी दिखाई। उन्होंने इस सफलता का श्रेय कृषि विभाग लोरमी और जिला प्रशासन मुंगेली को दिया है।

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