राष्ट्रीय न्यूज़: भारत बंद 12 फ़रवरी 2026, 30 करोड़ श्रमिकों का ग्रैंड प्रोटेस्ट

देशभर में भारत बंद का असर महसूस किया गया, जिसे 10 से अधिक केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने बुलाया था। इस व्यापक हड़ताल में लगभग 30 करोड़ (300 मिलियन) श्रमिकों और किसानों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है, जो पिछले विरोध प्रदर्शनों की तुलना में भारी भागीदारी का संकेत है। यूनियनों का आरोप है कि सरकार की नयी श्रम संहिताएँ और मुक्त व्यापार समझौते श्रमिकों और किसानों के हितों के खिलाफ हैं, जिससे रोजगार सुरक्षा, न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और स्थानीय कृषि को गंभीर खतरा है।
भारत बंद के चलते 12 फ़रवरी को कई सार्वजनिक क्षेत्रों में व्यवधान देखा गया — विशेषकर बैंकिंग, शिक्षण संस्थान, परिवहन सेवाएँ, और सरकारी कार्यालयों में। कई स्थानों पर ऑफिस और मार्केट बंद रहे और यात्रियों को प्रभावित यातायात का सामना करना पड़ा। केंद्रीय ट्रेड संघों ने बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण बंद की अपील की, लेकिन विरोधियों का कहना है कि यह बंद नीतिगत विरोध से बढ़कर मौजूदा सरकार की नीतियों को बदलने की कोशिश है।
विरोध के बीच राजनीतिक घमासान भी तेज़ हुआ है — कुछ विपक्षी दलों ने इसे “सरकार के खिलाफ मजदूर-किसान आंदोलन” करार दिया, जबकि सरकारी spokespeople ने इसे महँगाई और नियमों में बदलाव को लेकर भ्रांतिपूर्ण प्रचार कहा। इस विवाद ने राष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर गहरा असर दिखाया है, और यह सवाल उठ रहा है कि क्या भारत बंद वास्तव में सरकार की नीतियों को वापस ला सकता है या केवल सामाजिक तनाव को बढ़ावा देगा।




