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नईदिल्ली : किसके आदेश पर संविधान बेंच को भेजी गई थी हमारी याचिका

नई दिल्ली  : चीफ जस्टिस पर महाभियोग के प्रस्ताव को मंजूरी देने की कांग्रेस की मांग वाली याचिका को संविधान बेंच को ट्रांसफर किए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है। कांग्रेस ने याचिका को संविधान बेंच को सौंपे जाने के बाद अपनी अर्जी ही वापस ले ली है और सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा, हम जानना चाहते थे कि आखिरी रातोंरात अर्जी को संविधान बेंच को ट्रांसफर करने का फैसला किसने लिया।

कांग्रेस ने याचिका को संविधान बेंच को सौंपे जाने के बाद अपनी अर्जी ही वापस ले ली है और सवाल खड़े किए हैं

उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 145 (3) के तहत यदि कोर्ट को लगे कि कानून की परिभाषा संविधान से जुड़ी हुई है तो फिर सुनवाई 5 जजों के सामने जाएगी। यह न्यायिक आदेश नहीं है। हम जानना चाहते हैं कि यह आदेश किसने पारित किया।सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से अर्जी वापस लेने के सवाल पर कहा, हम चाहते थे कि जो भी प्रशासनिक फैसला हुआ है, वह पता चले कि किसने किया है। यह हमें बताया जाए। यदि चीफ जस्टिस ने या किसी और ने इसे पास किया है तो उसकी कॉपी हमें दी जाए।

संविधान से जुड़ी हुई है तो फिर सुनवाई 5 जजों के सामने जाएगी

कपिल सिब्बल ने कहा, यदि ऐसे ऑर्डर की कॉपी हमें मिल जाती है तो हम यह तय करेंगे कि इस फैसले को हम चैलेंज करेंगे या नहीं। यह बात हमने कोर्ट के सामने रखी। इस पर अदालत ने यह नहीं बताया कि हम आदेश की कॉपी देंगे या नहीं देंगे। यह कहा गया कि आप मेरिट पर बात करें। आखिर हम अदालत के किसी फैसले को चैलेंज क्यों नहीं कर सकते? यदि ऐसा कोई ऑर्डर है तो हमें बताया जाए।

 हमें किसी जज से शिकायत नहीं

सिब्बल ने कहा कि हमें न्यायपालिका या किसी जज के खिलाफ कोई निजी शिकायत नहीं है। हम चाहते हैं कि कोर्ट की प्रणाली पूरी तरह स्वच्छ हो। हम कोर्ट की स्वायत्ता और संप्रभुता को बनाए रखना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि अदालत की प्रक्रिया पर विपरीत असर न पड़े। हमने ऐसा कोई मामला नहीं उठाया है, जो राजनीतिक हो। हमने जो भी मुद्दे महाभियोग प्रस्ताव में रखे हैं, वे किसी राजनीति से जुड़े नहीं है। कोर्ट में क्या हुआ, इससे जुड़े हुए हैं। कोई एक मुद्दा ऐसा नहीं है, जिसमें राजनीति हो। सरकार ऐसा आरोप लगा रही है कि यह राजनीति है तो आप बताएं कि कौन सा मुद्दा राजनीतिक है।

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