छत्तीसगढ़ न्यूज़ | Fourth Eye News

विश्व वानिकी दिवस पर छत्तीसगढ़ में वन संरक्षण और जलवायु जागरूकता पर मंथन

रायपुर। विश्व वानिकी दिवस 21 मार्च के अवसर पर छत्तीसगढ़ में वन संरक्षण, वृक्षारोपण और पर्यावरण जागरूकता को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। अरण्य भवन, नया रायपुर स्थित दण्डकारण्य सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में वन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और वन आधारित अर्थव्यवस्था जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों का जीवन प्रकृति से जुड़ा हुआ है और राज्य में वनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने प्रदेश में वन क्षेत्र के विस्तार, वन्यजीवों की संख्या में वृद्धि और राज्य की पहली रामसर साइट मिलने जैसी उपलब्धियों को सराहा। साथ ही विभागीय योजनाओं को लक्ष्य आधारित और चरणबद्ध ढंग से लागू करने की जरूरत बताई।

कार्यक्रम के दौरान टीईआरआई, नई दिल्ली द्वारा वन पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के मूल्यांकन, जलवायु परिवर्तन और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पादप बोर्ड के विकास मरकाम ने की। उन्होंने कहा कि वनों की रक्षा करना केवल सरकार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि वनों को स्थानीय अर्थव्यवस्था और आजीविका से जोड़ते हुए जैव विविधता संरक्षण के साथ आर्थिक लाभ भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से जुड़े वित्तीय संसाधनों जैसे जीसीएफ, जीईएफ और अन्य योजनाओं के तहत परियोजनाएं तैयार करने पर जोर दिया।

कार्यशाला में तकनीकी सत्र और पैनल चर्चा भी आयोजित की गई, जिसमें वनों से मिलने वाली पारिस्थितिकी सेवाओं, ग्रीन क्लाइमेट फंड परियोजनाओं और नाबार्ड की वित्तीय सहायता जैसे विषयों पर प्रस्तुतीकरण हुए। विशेषज्ञों ने वानिकी और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में हो रही प्रगति पर अपने विचार साझा किए, वहीं राष्ट्रीय अनुकूलन कोष परियोजना से जुड़े हितग्राहियों ने अपने अनुभव भी बताए।

इस वर्ष विश्व वानिकी दिवस की थीम “वन और अर्थव्यवस्थाएँ” रखी गई है। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य में वन आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना, जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करना और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।

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