लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास नोटिस

लोकसभा की कार्यवाही को लेकर सियासी संग्राम तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ Rule 94(c) के तहत अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंप दिया है। इस प्रस्ताव पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जिनमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, वाम दल, आरजेडी सहित लगभग सभी प्रमुख विपक्षी दल शामिल हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इससे दूरी बनाए रखी है।
नोटिस को लेकर एक और अहम बात सामने आई है—इस पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हस्ताक्षर नहीं हैं, जबकि प्रियंका गांधी वाड्रा ने दस्तखत किए हैं। कांग्रेस सांसद सुरेश कोडिकुन्निल, गौरव गोगोई और मोहम्मद जावेद ने महासचिव से मिलकर यह नोटिस सौंपा।
विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और विपक्ष की आवाज दबाई। प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि स्पीकर पर सरकार का दबाव है और उन्हें खुद सफाई देनी पड़ रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री सदन में उपस्थित नहीं हुए और स्थिति संभालने की जिम्मेदारी स्पीकर पर आ गई।
अविश्वास प्रस्ताव में चार मुख्य बिंदु उठाए गए हैं—
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का मौका नहीं दिया गया।
विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित किया गया।
एक बीजेपी सांसद को पूर्व प्रधानमंत्रियों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने दी गई।
कांग्रेस सांसदों पर साजिश का आरोप लगाया गया।
संविधान के अनुच्छेद 94 और लोकसभा नियम 200 के तहत स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया निर्धारित है। प्रस्ताव के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है और नोटिस के 14 दिन बाद किसी दिन इसे चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान के दौरान स्पीकर अध्यक्षता नहीं कर सकते।
हालांकि संख्या बल को देखते हुए यह प्रस्ताव पास होना मुश्किल माना जा रहा है। विपक्ष के पास करीब 220 सांसद हैं, जबकि एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है। ऐसे में प्रस्ताव लाना आसान, लेकिन पारित कराना चुनौतीपूर्ण होगा।


