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मनरेगा से बदलेगी अंधरू बैगा की तकदीर, आजीविका डबरी बनेगी आत्मनिर्भरता का आधार

रायपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ग्रामीण परिवारों के लिए सिर्फ रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि स्थायी आजीविका का मजबूत आधार बन रही है। जनपद पंचायत पंडरिया के ग्राम पंचायत लोखान अंतर्गत कमराखोल में विशेष पिछड़ी जनजाति के दिव्यांग हितग्राही अंधरू बैगा के लिए बनाई जा रही आजीविका डबरी उनके जीवन में नई उम्मीद लेकर आई है।

ग्राम सभा में जब मनरेगा के तहत प्रस्तावित कार्यों की जानकारी दी गई और डबरी निर्माण के लाभ बताए गए, तो अंधरू बैगा ने भी इस योजना का लाभ लेने का निर्णय लिया। वे पहले से मनरेगा में पंजीकृत हैं और नियमित रूप से कार्य कर रहे हैं। ग्राम सभा ने प्रस्ताव पारित कर करीब 1.05 लाख रुपये की लागत से डबरी निर्माण को स्वीकृति दी।

निर्माण कार्य जारी है और अब तक 574 मानव दिवस का रोजगार सृजित हो चुका है। स्वयं अंधरू बैगा को 36 दिनों का रोजगार मिला, जिसके एवज में 9,360 रुपये की मजदूरी सीधे उनके बैंक खाते में जमा हुई। लगभग 20x20x3 मीटर आकार की यह डबरी तैयार होने पर करीब 894 घन मीटर पानी संचित करेगी। इससे मछली पालन, बाड़ी विकास और खेतों की सिंचाई के लिए स्थायी जल स्रोत उपलब्ध होगा।

मत्स्य पालन विभाग द्वारा मछली बीज, दवाइयां, जाल और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। डबरी के आसपास सब्जी उत्पादन की संभावनाएं बढ़ेंगी और निकट के बाजार कुई में बिक्री से आय में वृद्धि होगी।

अंधरू बैगा का कहना है कि इस पहल से उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आएगा और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे। मनरेगा उनके लिए रोजगार के साथ सम्मानजनक जीवन की राह खोल रही है।

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