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पाकिस्तान में महंगाई और पेट्रोल के बम से सड़कों पर फूटा जनआक्रोश, 500 से ज्यादा जगहों पर चक्का जाम

पाकिस्तान में आसमान छूती महंगाई और पेट्रोल पर लगाए गए भारी-भरकम टैक्स के खिलाफ जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। देश के प्रमुख शहरों में हुए उग्र प्रदर्शनों से यातायात ठप हो गया है।

कंगाल हो चुके पाकिस्तान के अंदरूनी हालात अब पूरी तरह विस्फोटक हो चुके हैं। देश में आसमान छूती महंगाई, खाने-पीने की किल्लत और पेट्रोल-डीजल पर थोपे गए दमनकारी टैक्स (Petroleum Levy) के खिलाफ आम जनता का सब्र टूट गया है। देश के प्रमुख आर्थिक और वाणिज्यिक केंद्रों में हालात उस वक्त बेकाबू हो गए जब हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए।

देशभर में फैली इस भयानक बदहाली के बीच प्रमुख राजनीतिक दलों और संगठनों, खासकर जमात-ए-इस्लाम (JI) के आह्वान पर हुए व्यापक प्रदर्शनों ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी है। कराची, लाहौर, पेशावर, क्वेटा, इस्लामाबाद और रावलपिंडी समेत 500 से अधिक स्थानों पर मुख्य राजमार्गों और एक्सप्रेसवे को पूरी तरह जाम कर दिया गया है।

आर्थिक कुप्रबंधन का नतीजा: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की शर्तों के नाम पर पाकिस्तानी हुक्मरानों द्वारा जनता पर लगातार टाॅक्स का बोझ डाला जा रहा है, जिससे आम आदमी का जीना मुहाल हो गया है।

परिवहन और व्यापार ठप: देश के मुख्य ट्रांसपोर्ट हब और हाईवे पर घंटों चले धरने और प्रदर्शनों के कारण आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।

विशाल विरोध की चेतावनी: आंदोलनकारियों साफ चेतावनी दी है कि यह प्रदर्शन तो सिर्फ एक ‘ट्रेलर’ है और आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों के आवासों का घेराव कर बड़े पैमाने पर अनिश्चितकालीन धरने दिए जाएंगे।

पाकिस्तान की सरकार और अभिजात वर्ग (Elite Class) अपनी ऐशो-आराम की जिंदगी में मस्त हैं, जबकि आम नागरिक दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहा है। सरकार की नाकामी ने मुल्क को गृहयुद्ध जैसे हालातों की तरफ धकेल दिया है।

संभावित असर: इस बड़े पैमाने पर हो रहे जनआक्रोश और सड़क जाम से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और ठप होगी। यदि सरकार ने तुरंत राहत नहीं दी, तो यह आर्थिक असंतोष एक बड़े राष्ट्रव्यापी तख्तापलट या बड़े राजनीतिक संकट का रूप ले सकता है।

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